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कम वजन के शिशु की देखभाल एवं संक्रमण से बचाव करें: सीएमएचओ

7 वर्ष पहले
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नवजातएवं कम वजन के शिशुओं की देखभाल एवं संक्रमण से बचाव करना बहुत ही जरूरी है। सीएमएचओ डॉ. ओपी गौतम ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है। जिसमें बताया गया है कि नवजात शिशु का जन्म के समय वजन 2.5 किग्रा से कम होने पर उसे कम वजन का शिशु कहा जाता है।

प्रदेश में जन्म लेने वाले नवजात शिशु में से आधे नवजात शिशु कम वजन के होते हैं। इन शिशुओं में जटिलताओं की संभावना सामान्य वजन वाले नवजात शिशुओं से अधिक होती है। उन्होंने बताया कि शिशु को हर समय सूखा रखें और गर्म कमरे में रखें, जन्म के कुछ दिनों बाद तक शिशु को नहलायें नहींं। शिशु को कपड़े की 2-3 परत में लपेटे और ध्यान रखें कि सिर और पैर ढके हुए हैं (टोपी और मोजे पहनाकर रखेंं), सर्दी के दौरान शिशु को गर्म कपड़े की अतिरिक्त परतों से लपेटें और कंबल भी उड़ाएं। उन्होंने बताया कि ऐसे शिशुओं को सिर्फ मां के दूध दिया जाना चाहिए, दिन में 12-13 बार स्तनपान कराना चाहिए। रात में कम से कम 4 बार स्तनपान कराना चाहिए। माँ के दूध के अतिरिक्त और कुछ भी शिशु को दें। यदि शिशु ठीक प्रकार से मां का दूध नहीं चूस पा रहा है, उसे स्तनपान कराने के बाद मां के दूध को शिशु को चम्मच आदि जो भी उपलब्ध हो उससे पिलाएं।

उन्होंने कहा कि नवजात शिशु को संक्रमण लगने की संभावना अधिक होती है क्योंकि उनमें संक्रमण लगने की संभावना अधिक होती है और संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम होती है। शिशु को तय समय पर टीकाकरण के लिए अपने स्वास्थ्य केन्द्र जरूर ले जाएं।

उन्होंने कहा है शिशु सुस्त हो, उसकी हरकत कम हो और रोना कमजोर पड़ गया हो, दूध ठीक से पी पा रहा हो, बुखार हो या शरीर ठंडा लगे शिशु का पेट छूने पर ठंडा लगे, सांस लेने में परेशानी या तेज श्वांस चल रही हो, गहरी पीलिया, शरीर के किसी भी हिस्से से खून बह रहा हो, इनमें से यदि कोई भी चिन्ह नवजात शिशु में नजर आए तो समझो वह खतरे का लक्षण है। उसे तुरंत स्वास्थ्य केन्द्र ले जाना चाहिए।