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भगवान जन्म से तो, व्यक्ति कर्म से महान होता है : क्षुल्लक जी

7 वर्ष पहले
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शहरके सागर नाका स्थित सदगुंवा जैन मंदिर में शुक्रवार को विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान आचार्य विराग सागर महाराज के शिष्य जनसंत विरंजन सागर महाराज का 34 वां अवतरण दिवस मनाया गया। इस आयोजन के दौरान सुबह 7 बजे श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा पूजन कर किया गया। जिसमें सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य हरिश्चंद जैन को मिला।

शांति धारा पदमचंद एवं नेमीचंद जैन द्वारा की गई। इसके बाद बडे़ बाबा विधान का आयोजन किया गया। इस दौरान पीत वस्त्रधारी भक्तों ने बडे़ बाबा का विधान धूमधाम एवं भक्ति भाव के साथ किया। आयोजन के दौरान शाम को श्री जी की महाआरती के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में शहर सहित आस-पास के क्षेत्रों से आए जनसंत के भक्तों की मौजूदगी रही।

यह बात जनसंत विरंजन सागर जी महाराज के अवतरण दिवस के अवसर पर प्रवचन देते हुए क्षुल्लक विशौम्य सागर जी महाराज ने कहा कि इस संसार में तीन प्रकार के लोग होते है। एक वो होते है जो जन्म से महान होते है। दूसरे वे होते है, जो जन्म को महान बनाते है। वहीं तीसरे वो जो तो जन्म से महान होते है, और ही जीवन को महान बनाते है। पहले प्रकार के भगवान होते है। जो जन्म से ही महान होते है। जो जगत को महान उपदेश देते हैं। साथ ही अंत में महानता को पैदा करते हैं। जिस वजह से उन्हें हमेशा ही याद किया जाता है। उन्हींने आगे प्रवचन में कहा कि दूसरे प्रकार के व्यक्ति वो होते है जो जन्म से तो महान नहीं होते। लेकिन अपने जीवन में साधु संत बनकर तपस्या करके जीवन को महान बना लेते है। यही काम आज जनसंत विरंजन सागर जी महाराज ने किया हैं। जिन्होंने दमोह जिले के ग्राम सदगुंवा में सेठ कंछेदीलाल के यहां जन्म लेकर जैनेश्वरी दीक्षा आचार्य विराग सागर जी महाराज से ली है।

दीक्षा के बाद पूरे समाज को महान बनाने के लिए भारत भर में विचरण कर रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन को महान बना लिया है। साथ ही लोगों को धर्म का रास्ता दिखा रहे है। नौ साल की संत अवस्था में हमेशा ही उन्होंने लोगों को जिनधर्म के मार्ग पर चलाने का काम किया हैं। साथ ही लोगों को महान होने का उपदेश दे रहे है।