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घायल जेल अधीक्षक को जिला अस्पताल में न दवा मिली और न एम्बुलेंस, जबलपुर भेजा गया

5 वर्ष पहले
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गैसाबाद के पास सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल सागर सेंट्रल जेल के अधीक्षक अमित मिश्रा को हटा सीएचसी से दमोह जिला अस्पताल लगाया गया। यहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए उन्हें डाक्टरों ने नार्मल सलाईन (एनएस) चढ़ाने के लिए कहा, तो नर्सों ने कह दिया कि स्टाक नहीं है, बाजार ने मंगवानी पड़ेगी। इस बीच अस्पताल पहुंचे दमोह के जेलर एनएस राणा ने अपने जेब से रुपए देकर मेडिकल से बॉटलें मंगवाईं, तब कहीं अधीक्षक को लगाई जा सकीं। इतना ही नहीं हालत गंभीर होने पर उन्हें जबलपुर रेफर करने के लिए 108 वाहन की व्यवस्था भी नहीं हो सकी। सिविल सर्जन बीआर अग्रवाल ने कहा कि गाड़ी का इंतजाम हो रहा है, लेकिन आधा घंटे के बाद पता चला कि गाड़ी हिंडोरिया गई है। ऐसे में मौके पर पहुंचे एसपी तिलक सिंह ने तुरंत निजी एंबुलेंस बुलाई और उससे जेल अधीक्षक को जबलपुर भिजवाया।

जिला अस्पताल में किस तरह स्वास्थ सेवाएं चरमरा गईं हैं, इसका उदाहरण शुक्रवार को देखने को मिला। यहां पर गंभीर रूप से घायल जेल अधीक्षक के इलाज के लिए पर्याप्त दवाएं तक नहीं मिलीं। सूचना मिलने पर सिविल सर्जन सहित पांच डाक्टर मौके पर पहुंचे, लेकिन दवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़ा हो गया। सर्जन डॉ. उमेश तंतुवाय ने स्टाफ नर्स से अधीक्षक के लिए एनएस बॉटल चढ़ाने के लिए कहा, इस पर नर्स ने मना कर दिया और कहा कि नहीं है, ऐसे में घायल को डीएनएस ग्लूकोज की बॉटल चढ़ाई गई। सिर पर गंभीर चोट होने पर टांके लगाए गए और पट्टी बांधी गई, लेकिन जब पट्‌टी काटने की बारी आई तो कैंची नहीं चली। डॉ. तंतुवाय ने बताया कि घायल के सिर और सीने में गंभीर चोटें आईं हैं और बीपी भी स्थिर बना हुआ है। ऐसी स्थिति में उन्हें जबलपुर रैफर किया गया है। वहां पर सीटी स्कैन के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। यहां पर बता दें कि जेल अधीक्षक अमित मिश्रा वर्ष 2011 में दमोह में अधीक्षक के रूप में पदस्थ थे। करीब दो साल के कार्यकाल के बाद उनका स्थानांतरण हुआ था। वे मूल रूप से सतना जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में सागर सेंट्रल जेल में अधीक्षक के रूप में पदस्थ हैं।

हटा जेल का निरीक्षण किया और खाना खाया

हादसे से पहले जेल अधीक्षक श्री मिश्रा ने हटा जेल का निरीक्षण किया और करीब पौने दो घंटे तक जेल में ही रहे। यहां पर उन्होंने खाना भी खाया। हटा जेलर एके शुक्ल ने बताया कि खाना खाने के बाद उन्होंने कुछ देर आराम किया, लेकिन बाद में सतना जाने का कहकर वे निकल गए। बताया जाता है कि खाना खाने के बाद वाहन के चालक जेल आरक्षक यूपी सिंह को झपकी आ रही थी, उसने इस बात का जिक्र हटा जेलर से किया था।

अभी इलाज चल रहा है
गंभीर रूप से घायल जेल अधीक्षक के साथ दमोह जेलर एनएस राणा जबलपुर गए हैं। उन्होंने भास्कर से चर्चा में बताया कि अभी जांचें चल रहीं हैं। कुछ कहा नहीं जा सकता क्या स्थिति है। डाक्टरों कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

मौके पर पहुंचे सिविल सर्जन बीआर अग्रवाल से जब पूछा गया कि अधीक्षक को चढ़ाने के लिए बॉटल क्यों नहीं मिलीं। इस पर उन्होंने बताया कि वाे लोग पागल हैं, जो बाजार से दवाएं खरीदकर ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर दवाओं का कोई टोटा नहीं है। हर तरह की दवाएं मौजूद हैं। जब उन्हें उदाहरण बताया गया तो उन्होंने पूरी बात को नकार दिया।

पागल हैं जो बाजार से दवाएं लाते हैं
हादसे का शिकार होने के बाद गाड़ी से 3 लाख 25 हजार रुपए की राशि बरामद हुई। यह राशि गैसाबाद के सरपंच लक्ष्मण तिवारी ने पुलिस के सुपुर्द की। प्रत्यक्षदर्शी डॉ. बंगाली ने बताया कि गाड़ी की स्पीड अधिक थी, जब उसका टायर फटा, तो 8 से 10 बार पलटी खाकर गाड़ी खेत में जा घुसी। उन्होंने बताया कि गाड़ी का टायर फटने से उसका संतुलन बिगड़ और यह हादसा हो गया। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी चर्चा रही कि इतनी सारी राशि लेकर जेल अधीक्षक कहां जा रहे थे।

सरपंच ने पुलिस को सुपुर्द की राशि
1. हादसे के बाद मौके पर पड़ी कार। 2. जिला अस्पताल पहुंचे घायल जेल अधीक्षक। 3. बाद में जेल अधीक्षक को निजी वाहन से जबलपुर भेजा गया।

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