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राम का नाम सर्वत्र व्याप्त है : जनसंत विरंजन सागर

7 वर्ष पहले
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दमोह. सागरनाका स्थित सदगुवां जैन मंदिर में विराजमान जनसंत विरंजन सागर महाराज ने सोमवार को प्रवचन दिए। उन्होंने अपने प्रवचनों में कहा कि जहां पर राम है। वहां पर आराम है। जहां राम है वहां पर विश्राम है। वरना आदमी जीवन भर आराम-आराम चिल्लाता रहता है और मरते दम तक उसे आराम नहीं मिलता है। क्योंकि वह उस आराम शब्द से अपरिचित है। आराम शब्द में राम छिपा हुआ है। आदमी हर जगह आराम खोजता है। वह अपने आप में कही भी राम की खोज नहीं करता। यदि वह अपने आप मंे राम की खोज कर लेता है तो उसे किसी भी आराम की जरूरत नहीं होती। क्योंकि राम सर्वत्र व्याप्त है। उन्होंने आगे कहा जिस दिन राम का चरित्र और चादर दोनों का आदर मिट जाएगा। उस दिन जीवन का अनादर हो जाएगा। दुनिया सर्वनाश की कगार पर खडी़ हो जाएगी। धर्म उस पुल के समान है जो दो तटों को जोड़ता है। अतः धर्म का काम जोड़ने का होता है। वहीं अधर्म वह चट्टान है जो नदी को दो धाराओं मेंे तोड़ती है। जब धर्म की निर्मल सरिता में कोई झूठे धर्मात्मा की चट्टान आती है।