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डाइट विटामिन मिलने से स्वस्थ नहीं हो पा रहे बच्चे
जिलाअस्पताल पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों को 14 दिन भर्ती करने का नियम हैं लेकिन जाने वह कौन सी वजह है कि कुपोषित के माता-पिता 2 से 4 दिन में ही यहां से बच्चों को लेकर चले जा रहे हैं। पूरी तरह से डाइट विटामिन नहीं मिलने से बच्चे स्वस्थ नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में पोषण पुनर्वास केंद्र के औचित्य पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। गौरतलब है कि महिला बाल विकास और यूनीसेफ द्वारा कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने के लिए ब्लाक स्तर पर पोषण पुनर्वास केंद्र बनाए गए हैं। जहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुपोषित बच्चों को खोज कर भर्ती कराती है। एक कुपोषित बच्चे को पोषित करने के लिए 14 दिन तक केंद्र में भर्ती कर उसे आहार और विटामिनयुक्त भोजन दिए जाने का नियम हैं। लेकिन यहां ऐसा नहीं हो पा रहा है। पिछले 11 माह में केंद्र में आए बच्चों के आंकड़ों पर गौर किया करें तो पुनर्वास केंद्र में 324 बच्चों को भर्ती कराया गया है। जिनमें बामुश्किल डेढ़ सौ के करीब बच्चे पूरे दिन का कोर्स कर पाए हो, बाकी के बच्चे अपने घर चले गए हैं।
बहानेबनाकर चले जाते हैं : केंद्रमें कार्यरत पोषण आहार सलाहकार संगीता चौरसिया ने बताया बच्चों के अभिभावक तरह-तरह के बहाने बनाकर कुपोषित बच्चों को घर ले जाते हैं। क्योंकि उन्हें यहा रुकना अच्छा नहीं लगता है। उन्होंने बताया कि वे उन्हें जाने की अनुमति नहीं देतीं हैं फिर भी माता-पिता बिना बताए ही बच्चों को लेकर चले जाते हैं। खासकर महिलाएं इसके लिए ज्यादा बहाना बनाती हैं।
आंगनबाड़ीकार्यकर्ता नहीं दे रही ध्यान: शहरीएवं ग्रामीण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को ऐसे बच्चों को जो कुपोषण के शिकार हैं उन्हें खोजकर केंद्र में भर्ती कराने, वहीं समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्र में अपने क्षेत्र के बच्चों का वजन तौलने एवं उन्हें पोषण आहार देने और उनके माता पिता को उचित सलाह देने की जिम्मेदारी शासन ने सौंपी है। ताकि बच्चे को समय पर पोषण आहार दिया जा सके और उसे कुपोषण की भयंकर बीमारी से बचाया जा सके। लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा अपने इस दायित्व के प्रति लापरवाही बरती जा रही है। कुछ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को यहां लाती हैं। जिन्हें पूरी डाइट दी जाती है।
केंद्रमें बचे 7 बच्चे : केंद्रमें रविवार के दिन 7 बच्चे मौजूद थे। वहां के कर्मी ने बताया कि नंबवर-दिसंबर माह में अलग-अलग तारीख को आंगनब