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पापों का पुतला है मानव : संजीव भैया

7 वर्ष पहले
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मनुष्य गलतियों और पापो का पुतला है। मनुष्य द्वारा प्रति पल गलतियां और पाप कार्य होते रहते हैं। मनुष्य द्वारा वर्षभर की गई गलतियों और पापो के प्रक्षालन के लिए प्रतिक्रमण करना आवश्यक है। अपनी गलतियों और पापो पर प्रायश्चित कर लेने से उनका प्रतिफल कम हो जाता है। जैन धर्म में प्रतिदिन मासिक और वार्षिक प्रतिक्रमण की परंपरा है। वर्ष में एक बार अपने पापो के प्रायश्चित के लिए वार्षिक प्रतिक्रमण अवश्य कर लेना चाहिए। जैन साधुओं के साथ साथ जैन श्रावकगण भी वार्षिक प्रतिक्रमण द्वारा अपनी गलतियों और पापो की गठरी को हल्का कर लेते हैं। मानव के द्वारा मन वचन काय के द्वारा दुनिया के समस्त प्राणियों से क्षमा याचना सहित प्रतिक्रमण किया जाता है। ये उद्गार ब्रम्ह. संजीव भैया ने दिगंबर जैन धर्म शाला में चल रहे सिद्धचक्र महा अर्चना विधान में आयोजित वार्षिक प्रतिक्रमण के अवसर पर कहे। इस अवसर पर प्रात:काल श्रीजी का पूजन एवं सामूहिक शांतिधारा संपन्न हुई। जिसमें बड़ी संख्या में विभिन्न जैन मंदिरों के भक्तों ने झूम झूमकर नृत्य के साथ भगवान के महापूजन में सहभागिता की।

दमोह। जैन धर्मशाला में आयाेजित कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु।

दमोह। जैन धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु।