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बिना सदगुरु के परमात्म तत्व का ज्ञान नहीं होता : पं. शास्त्री

7 वर्ष पहले
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बेलाताल टापू मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन कथाचार्य रवि शास्त्री ने बताया कि हमें भगवान से संसार रूपी धन नहीं बल्कि यह मांगना चाहिए कि हे प्रभु मेरा चित्त निरंतर आपके चरण कमलों में लगा रहे। मैं आपको कभी भूलूं नहीं। शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं अनंत हैं। उनकी महिमा अपार है। पूतना उद्धार का प्रसंगु सुनाते हुए उन्होंने कहा कि पूतना का अर्थ है अज्ञान, अविद्या पूतना वासना का स्वरूप हैं। माया में फंसे हुए व्यक्ति को ही पूतना मारती है।

श्रीकृष्ण तो परब्रम्ह परमात्मा हैं। गुणातीत हैं माया से रहित महायोगी हैं। उन्हें तो माया स्पर्श भी नहीं कर सकती फिर पूतना जैसी रात सनी उन्हें कैसे भार सकती है?