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जांच रिपोर्ट में पारले-जी बिस्किट और टाटा नमक निकला अमानक

7 वर्ष पहले
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^खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत खाद्य व्यापारियों को तय मानकों के अनुसार ही खाद्य सामग्री का विक्रय निर्माण करने के निर्देश जारी किए गए हैं। हाल ही में भोपाल स्थित राज्य प्रयोगशाला से 18 सैंपलों की जांच रिपोर्ट भेजी गई है। जिसमें से सभी सेंपल फेल पाए गए हैं। जिले में यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। -राकेश अहिरवाल, जिलाखाद्य सुरक्षा अधिकारी दमोह

भास्कर संवाददाता। दमोह

खाद्यऔर औषधि प्रशासन विभाग की ओर से सितंबर के आिखरी में लिए गए सेंपल जांच रिपोर्ट में अमानक निकले हैं। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश अिहरवाल ने बताया सितंबर में नामी गिरामी कंपनियाें के प्रोडक्ट के सेंपल लिए गए थे। उन्होंने बताया कि कलेहरा से पारले-जी बिस्कुट के सेंपल लिए गए थे जो भोपाल स्थित राज्यप्रयोग शाला भेजे गए थे जहां जांच में फेल हो गए हैं। उसमें मित्थाछाप गलत लेवलिंग पाई गई है। इसके अलावा नोहटा, दमोह, पटेरा, तेंदूखेड़ा से भी कई दुकानों से पारले-जी बिस्कुट के लिए गए सेंपल जांच रिपोर्ट में फेल पाए गए हैं। इसमें तेंदूखेड़ा की एक दुकान से लिए गया सेंपल में प्रतिबंधित फूड एसीटिव का प्रयोग पाया गया है। जो मानव स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। इसी तरह बटियागढ़ की एक किराना दुकान से टाटा साल्ट एवं घंटाघर दमोह से टाटा शक्ति नमक के सेंपल भी फेल हो गए हैं। जानकारी के अनुसार खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जिल में खाद्य वस्तुओं के 51 नमूने लेकर भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजे गए थे। जिसमें 18 सैंपलों की रिपोर्ट भेजी गई है। यह सभी 18 सेंपल फेल हो गए हैं। गौरतलब हो कि खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत किसी भी खाद्य पदार्थों की बिक्री एवं उनका निर्माण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा मानक तय किए गए हैं। यदि इन मानकों का पालन नहीं किया जाता तो संबंधित विक्रेताओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

अबतक ढाई लाख का जुर्माना

जिलेमें पिछले एक साल के दौरान जांच रिपोर्ट में फेल होने वाले खाद्य विक्रेताओं के प्रकरण एडीएम कोर्ट में दायर किए गए हैं। जिनमें से खाद्य सुरक्षा मामलों के न्याय निर्णयन अधिकारी एडीएम अनिल शुक्ला द्वारा 31 मामलों में फैसला सुनाकर जुर्माना लगाया गया है। इस प्रकरण अब तक ढाई लाख रुपए का जुर्माना वसूला जा चुका है। अभी भी कोर्ट के पास हर माह प्रकरण दायर किए जा रहे हैं।