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कतकारियों ने भगवान कृष्ण को लगाया छप्पन भोग

7 वर्ष पहले
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कुचईयां बनाकर ली कान्हा की बलैयां

कार्तिकपूर्णिमा पर गुरुवार को कतकारी महिलाओं ने मंदिरों में जाकर पूजन आरती कर कथा सुनी दीपदान किया। कतकारियों ने भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया। विभिन्न प्रकार के पकवानों से महल तैयार किया। कतकारी महिलाओं ने पकवानों में भगवान श्रीकृष्ण के लिए गेंद बल्ला और मुरली के साथ माखन की मटकी भी बनाई। सात लाल कुचईंया बनाकर कान्हा की बलैयां लीं। करवा चाैथ से शुरू कार्तिक पूजन का कार्तिक पूर्णिमा पर समापन हुआ।

कतकारी महिलाओं ने मंदिरों सामूहिक रूप से पूजन आरती कर कथा सुनी शाम को दीपदान किया। व्रत उद्यापन चौथे को होगा। इस दिन महिलाएं सुहागलें करेंगी, सामूहिक भोज का आयोजन भी होगा। इसके बाद व्रत का समापन होगा। गुरुवार को शहर के बूंदाबहू मंदिर, मारवाड़ी मंदिर, बेलाताल टापू मंदिर सहित अन्य मंदिरों में महिलाओं ने पहुंचकर पूजन किया। डलियां सजाई पकवानों से महल तैयार किया। कतकारी महिला राधारानी सेन, मालती राठौर ने बताया कि करवा चौथ से उनका व्रत शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा को पूर्णाहुति होती है और संकटा चतुर्थी पर व्रत का समापन होता है। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा पर भगवान को छप्पन व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। पकवानों की डलियां सजाई जाती है। पकवानों में घर, खप्पर, चकौटी सहित महल तैयार किया जाता है। कान्हा के लिए पंलग, राधा-कृष्ण के लिए मुकुट, धर्म शिला, मटकी, गेंद, बल्ला, मुरली 7 कुचईयां बनाई जाती है जिनसे कान्हा की बलैयां ली जाती हैं। कतकारियों ने बताया कि पकवानों में 30 लड्डू और 30 बरा सभी डलियां में होते हैं। मारवाड़ी मंदिर के पुजारी पं. लकी राजौरिया ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह से स्नान आदि के बाद महिलाओं के द्वारा भगवान का मंडप बनाया गया, तुलसी का पूजन किया गया, चतुर्थी पर व्रत का उद्यापन किया जाएगा। मंदिर में अनीता पाटकर, लीला राठौर, सरला असाटी, विद्या विश्वकर्मा, चंद्ररानी राठौर, सहोद्रा राजपूत, मीरा राजोरिया, उर्मिला उपाध्याय, रेखा असाटी, लीला ठाकुर, बेवी असाटी, आभा ठाकुर, सुषमा खरे, गोमती, रामसखी सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूजन अर्चन कर दीपदान किया। चतुर्थी पर व्रत की पूर्णाहुति के साथ पंचमी को सभी महिलाएं लक्ष्मणकुटी धाम जाएंगी जहां सामूहिक गक्कड़ भोज का आयोजन किया जाएगा।

दमोह। कार्तिककी पूर्णिमा पर कतकारी महि