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प्रभु ने क्षमा को धारण किया है : माता जी

7 वर्ष पहले
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नेमीनगरमें चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ में गुरुवार को सभी इंद्र इंद्राणियों ने भाव विभोर होकर भक्ति नृत्य करते हुए श्री जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया। 6 बजे से ही केशरिया वस्त्र पहनकर सभी श्रावकगण मंदिर प्रांगण पहुंचे। मंगलाष्टक के साथ सकलीकरण दिग्बंधन का कार्य किया इसके बाद जप प्रारंभ हुआ।

मंत्रोचारण आर्यिका मां धारणमति माता जी के मुखार बिंद से हुआ। सभी कार्य गंजबासौदा से आए ब्र. राजेश टड़ा भैया ने विधि विधान पूर्वक कराए। एक हजार चौबीस अर्थ समर्पित कर सहस्र नाम विधान के साथ सिद्ध प्रभु का पूजन किया गया। इस अवसर पर आर्यिका मां धारणामति माता जी ने कहा कि प्रभु के हजार नाम हैं उन्हें किसी भी नाम से श्रद्धा पूर्वक पुकारो उनका नाम ही इस कलिकाल में परंपरा से मुक्ति का कारण है। इस मनुष्य प्राय को पाने को देवता भी तरसते हैं उसे पाकर भगवान की भक्ति, तप संयम आदि धारण करके सार्थक करना चाहिए। निगोद श्रिर्यच, नरक आदि पर्याय के बाद मिले मानव जन्म को विषय को विषय कपायों में व्यर्थ नहीं खोना चाहिए। दुर्लभता से प्राप्त उत्तमदेश, सुसंगति, श्रावक, कुक्र, संयम धारण, शुुद्धभाव और आत्मानुभूति बडे़ पुण्य से प्राप्त होती है। तपस्वियों को प्रणाम करने से उच्च कुल मिलता है। उनको दान करने से सुंदर रूप तथा उनकी पूजा भक्ति करने से यश कीर्ति प्राप्त होनी है। अतः हमे मानव पर्याय को शुभकार्यों में संलग्न रहकर अपनी आयु का शेष समय व्यतीत करना चाहिए। शाम 7 बजे से महाआरती हुई और अष्टकुमारी एवं इंद्राणियों ने भक्ति नृत्य किए। भोपाल से आए हेमंत एंड पार्टी ने संगीत से सभी को आनंद विभोर कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत बहन पूर्वो जैन ने सरस्वती वंदना करते हुए सुंदर प्रस्तुति की। मोनू जैन एवं पार्टी ने भगवान पारस नाथ के जीवन पर आधारित कमठ का उपसर्ग नामक नाटिका की सुंदर प्रस्तुति दी। नाटिका के माध्यम से बताया किस प्रकार पार्श्वनाथ भगवान ने क्षमा को धारण किया। ओले, पत्थर, पानी सब सहन किए पर विरोध नहीं किया केवल क्षमादान दिया। अंत में आभार मनीष मलैया, सुबोध जैन ने जताया।

दमोह। नेमीनगर कॉलोनी में चल रहे सिद्धचक्र विधान के अवसर पर अभिषेक करते श्रद्धालु।