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व्यक्ति के लालच के फल को दिखाती करनी-भरनी
शहर के मानस भवन में युवा नाट्य मंच द्वारा आयोजित किए जा रहे चार दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह के तीसरे दिन शनिवार को सागर के रंग प्रयोग संस्था के द्वारा नाटक करनी-भरनी का मंचन किया गया। दमोह सांसद प्रहलाद सिंह पटेल के मुख्य आतिथ्य में नाट्य समारोह की तीसरी शाम शुरू हुई। राजकुमार रैकवार द्वारा लिखित निर्देशित इस नाटक में लोगों को लालच का फल दिखाया गया।
नाटक की कहानी एक गांव की है, जहां पन्नी और फुल्लों नामक दंपत्ती के पास एक गौरी नामक भैंस है, जो उनकी देखभाल और प्रेम के चलते अत्याधिक दूध देेती है। उनकी इस भैंस को देेखकर गांव का जमींदार जलता है और अपनी प|ी इस बात से जलते है और अपनी भैंसों को भी गौरी जैसा बनाने के लिए जतन करते हैं। और असफल होने पर वह जलनवस गौरी को मार देते हैं। उसके बाद भी पन्नी और फुल्लो अमीर हो जाते हैं। वहीं लंबरदार अपनी लालच और करनी के कारण अपना सब कुछ खो बैठता है। कहानी में लोगों की बुंदेलखंड संस्कृति की झलक के साथ स्वांग की झलक लोगों को देखने को मिली और कलाकारों के द्वारा अपने अभिनय से पात्रों को सजीव कर दिया। इस नाटक ने दर्शकों को करनी भरनी के विषय पर सोचने पर मजबूर कर दिया। पात्रों में शंभु विश्वकर्मा, पूरन पटैल, आशीष श्रीवास्तव, अश्वनी बलैया, आशिफ राइ्रन , रामवीर प्रजापति, पूर्णिमा साहू, अमन मयूर, ऋषभ, गिरीश रैकवार, भूपेन्द्र पचैरा ने अपने अपने पात्रों को बखूबी निभाया है। साथ ही संगीत पक्ष को निर्भय पटेल और गिरधारी विश्वकर्मा ने बुंदेली रंगों में बेहतर ढंग से ढाला है। वेष-भूसा सीमा दुबे और प्रकाश समायोजन तनवीर अहमद का रहा। समारोह में रविवार को इलाहबाद के स्वर्ग रंगमंच द्वारा नाटक बहरूपिया का मंचन किया जाएगा।
लोककलाएं संसार की सर्वश्रेष्ठ कलाएं हैं : दुबे
फुटेरावार्ड स्थित सद्भावना स्कूल में लोक कलाएं राष्ट्र की धरोहर विषय पर युवा नाट्य मंच के द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने संबंधित विषय पर अपने विचार रखे। प्रमुख वक्ता के रूप में नरेन्द्र दुबे और साहित्यकार सत्यमोहन वर्मा रहे। नरेन्द्र दुबे ने अपने वक्तव्य में लोक कलाओं के संदर्भ में कहा कि लोक कलाएं संसार की सर्वश्रेष्ठ कलाएं हैं और लोक कलाओं के लिए हमें अपनी परंपरा और संस्कृति से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस कार्य में रूचि हो वहीं कार्य हमें करना चाहिए। सत