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जमीन के भीतर जल को तलाशने की स्वदेशी तकनीक बनाई

7 वर्ष पहले
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क्षेत्रीयसांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने लोकसभा में गॉड इनर्जी टेक्नालाॅजी को मान्यता देने के लिए सरकार से मांग की है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के पिछड़े क्षेत्र बुंदेलखंड के एक भू-गर्भशामी ने जमीन के भीतर जल को तलाशने की भारतीय तकनीक से चार यंयत्रों का निर्माण किया है। तकनीक का नाम गॉड इनर्जी टेक्नालाजी रखा है। पहले यंत्र है वार रेंज डिडेक्टर जो पानी की उपस्थिति बताता है।

दूसरा है वाॅटर एवैलबिलिटी डिडेक्टर को पानी का उलब्धता एवं क्षमता बतलाता है। तीसरा है वाॅटर फ्लो डारेक्शन डिडेक्टर जो पानी के प्रवाह की दिशा बतलाता है और चौथा है जो वाॅटर डेफ्त केलकुलेशन डिवास है जो पानी की कहराई 1000 मीटर तक बताने का दावा करता है। जबकि दुनिया में चीन ऐसा देश है जिसके पास 5000 मीटर तक गहराई जानने की इमेजिन नाम की मशीन है जो केंद्रीय जल बोर्ड के पास है लेकिन उसका उपयोग शुरू नहीं हो सका है। सांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने यह बात लोकसभा में सब्मिशन में कही है। आगे श्री पटेल ने कहा कि यह बहुआयामी तकनीक है। आसन्न जल संकट के समाधान के लिए सस्ती स्वदेशी एवं भरोसेमंद है। उक्त तकनीक पर बुंदेलखंड क्षेत्र से छतरपुर जिले के पं. बृजेश महाराज द्वारा कार्य किया जा रहा है।