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नदियों को इंटरलिंक करने गांववालों से िलए सुझाव
जिलेमें सिचाई क्षेत्र का रकबा बढ़ाने के लिए सिरीज ऑफ स्टामडेम के लिए कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने अधिकारीयों को टीएल बैठक के दौरान निर्देश दिए थे। अभी 9 फरवरी की बैठक मे उन्होने जिले की नदियों को इंटरलिंक करने सर्वे के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कहा था। बुधवार को सुबह कलेक्टर ने योजना को अमली जामा पहनाने मौके पर जाकर स्थलों को देखा, ग्रामीणों और किसानों से भी इस बारे में चर्चा की।
कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह अपने इस मिशन के तहत कोपरा हारठ गांव, खमरगौर सहित अन्य ग्रामों और स्थानों पर गये। उन्होने खमरगौर गांव में ब्यारमा-सुनार संगम का अवलोकन भी किया। रिवर इंटरलिंक और नदियों पर स्टापडेम बनाए जाने के संबध मे किसानों ग्रामीणांे से चर्चा की उनके सुझाव लिये। कलेक्टर ने लोगों से यह भी जानना चाहा कि किन स्थानों पर स्टामडेम या पानी रोकने के प्रयास किए जाएं जो बेहतर भी होंगे।
उन्होने इन नदियों पर ज्यादा जल भराव क्षेत्रों का भ्रमण भी किया। एसडीएम हटा राकेश कुशरे ने भी इस दौरान अपनी बातें रखी। कलेक्टर का कहना है कि इस तरह की कारवाई से जिले में पेयजल- सिचाई सुविधा के साथ ही गांवों में खेतो मे बने कपिल धारा कूप और अन्य कूपों मे जल स्तर भी बढे़गा ताकि जिन खेतों मे कुएं उपलब्ध है वे किसान बारहमासी फसलें सब्जी आदि का उत्पादन करें और अपनी आय का अतिरिक्त जरिये भी पैदा कर सके। ब्यारमा, कोपरा, सुनार, जूड़ी सहित अन्य नदियों मे स्टामडेम है, उन क्षेत्रो में कृषि उत्पादन बढ़ा है। उनका यह भी कहना है कि स्टापडेम निर्माण से विस्थापन और अन्य तरह की समस्या नहीं आती है। साथ ही डेम की प्रति हेक्टर लागत 3 लाख हो जबकि स्टापडेम की एक लाख लागत आती है। जिले में सिरीज आॅफ स्टापडेम हो जाने से लगभग एक लाख 70 हजार हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई होने लगेगी। बहता पानी के मानव जीवन में उपयोग के ढेरों फायदे भी है।
कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने हटा क्षेत्र की नदियों को इंटर लिंक करने के लेकर मैदानी क्षेत्र का जायजा लिया।
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