वृद्धों को अिधकार दिलाने हो पहल: िसंह
आयोजन में पेंशनरों, वरिष्ठ नागरिकों का हुआ सम्मान
भास्करसंवाददाता| दमोह
अंतर्राष्ट्रीयमानव अधिकार दिवस पर टाइम्स कालेज में बुधवार को वृद्धों के अधिकार विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि विशेष न्यायाधीश ताकेश्वर सिंह मौजूद रहे। इस अवसर पर श्री सिंह ने कहा कि वृद्धों से उत्तम पोषण लेकर उन्हें जूठी पत्तल की तरह फेंकना, मानव अधिकारों का घोर उल्लंघन है। हमारा संविधान सभी प्रकार के मानव अधिकारों का महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। उसे आचरण में उतार कर आचार संहिता की तरह अपनाने में वृद्धों के अधिकार का संरक्षण होगा।
इस अवसर पर नारायण सिंह ने अभिमत दिया कि वैयक्तिक या सामाजिक समस्याओं का निदान मानव अधिकार आयोग को पुलिस समीक्षा समापन के बाद करना चाहिए अन्यथा अधिकारों का संरक्षण दिलाने की व्यवस्था मात्र औपचारिक है। वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद कुमार श्रीवास्तव ने रोचक सस्मरणों के जरिए वृद्धों के अधिकार दिलाने की जोरदार वकालत की। प्रो. डॉ कमल चौरसिया ने सद्यः दिवंगत अपने पिता का स्मरण करते हुए, उनकी सेवा कठिन हालातों में पूर्ण निष्ठा सहित की और कहा कि लड़की हो या लड़का हो, मां बाप की सेवा करने में सबको आगे आना चाहिए।
कॉलेज के छात्र ब्रजेश तिवारी ने कहा कि वृद्ध अनुभव के जीवंत प्रकाश है उसमें आलोकित होकर हमें जीवन निखारना चाहिए और उनकी सेवा में कोई चूक नहीं करना चाहिए। नरेंद्र दुबे ने अपने दादी द्वारा सुनाई गई कहानी के जरिए स्थापना दी कि मां-बाप जैसा व्यवहार अपने बूढ़े माता-पिता से करते है वैसा ही उनके बच्चे करेंगे।
परिचर्चा का आयोजन मानव अधिकार आयोग जिला शाखा दमोह के तत्वावधान में किया गया। संयोजक आयोग मित्र डॉ. छविनाथ तिवारी ने आयोग की कार्यप्रणाली का विस्तार सहित उल्लेख किया और मप्र मानव अधिकार आयोग द्वारा प्रकाशित वृद्वजनों के अधिकार पुस्तिका से वृद्वजनों के लिए प्रमुख सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए गीत पढ़ा कि वृद्ध-बांटते प्रकाश, शील की उजास, बीते उल्लास है। इनका अपमान करना घोर अमानवीय अपराध है।
प्राचार्य डॉ. अनिल गुप्ता ने संदेश दिया है कि वृद्धाश्रम आज के परिवेश की जरूरत है। इनकी उचित व्यवस्था करना समाज सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। आभार प्रदर्शन करते हुए कॉलेज के संचालक सुशील गुप्ता ने मंत्र दिया कि वृद्धों का अधिकार-अपनों का प्यार है। कार्यक्रम