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अधिकार प्राप्ति के लिए क्रूरता नहीं आनी चाहिए : डॉ. जैन

7 वर्ष पहले
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मानव अधिकार दिवस पर गोष्ठी हुई

निजसंवाददाता | हटा

मानवका अधिकार उसके जन्म से जुड़ जाता है। शिशु को संरक्षण देना, उसका लालन पालन उसके मानवीय अधिकार है। मानव को अधिकारों के संरक्षण के लिए क्रूरता नहीं आनी चाहिए। समता, समानता के भाव से ही निर्णय होते हैं। यह बात मानव अधिकार दिवस पर बुधवार को न्यायालय परिसर में आयोजित एक गोष्ठी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुभाष जैन ने कही। श्री जैन ने महाराजा विक्रमादित्य का उदाहरण देते हुए कहा कि समानता का भाव रखकर निर्णय देने पर आज भी उन्हें न्यायप्रिय राजा माना जाता है। प्रथम श्रेणी न्यायाधीश सीएस सैयाम ने कहा कि मानव को उनके मौलिक अधिकार मिले इसी पर आधारित संविधान बना हुआ है।

वरिष्ठ अधिवक्ता भगवती श्रीवास्तव दमोह ने कहा कि मानव पीड़ा बंद हो, सभी को शिक्षा, दवा, रोटी, कपड़ा, आवास मिले यही उनके अधिकार है। अधिकारों का संरक्षण के लिए कई स्वयं सेवी संस्थाएं कार्य कर रही है। अधिकार केवल स्वयं के लिए हो बल्कि दूसरों के अधिकारों की रक्षा करना हमारा धर्म होना चाहिए। तहसील अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय व्यास, अधिवक्ता पीसी गर्ग, प्रहलाद बैगवार, हरिशंकर दीक्षित, मुकुल चौबे, डीपी पटेल ने कहा मानव के अधिकारों का हनन हो इसके लिए स्वयं सेवी संस्थाओं को सकारात्मक कदम उठाने होंगे। कार्यक्रम का संचालन अमिताभ चतुर्वेदी ने किया। आभार कंदर्प त्रिवेदी ने जताया। गोष्ठी में सरकारी अधिवक्ता रामशंकर गर्ग, लखन भवैदी, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश असाटी, रईस खान, जागेश्वर पटेल, दिलीप ताम्रकार, सपन जैन, अरविंद्र शर्मा मौजूद थे।

हटा| न्यायालयपरिसर में आयोजित संगोष्ठी में मौजूद न्यायाधीशगण।