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राम के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक : विरंजन
हमाराजीवन अभी भी रामायण है। यदि आप पढ़ सको तो राम अभी भी मौजूद हैं। यदि देख सको तो रावण अभी भी जिंदा है। यह सब अनुभव करने के लिए समझना अति आवश्यक है। हजारों साल पहले इस धरा पर आए राम का जीवन अब हमारे लिए मात्र एक कहानी है। लेकिन उस समय जो घटित हुआ वह हमारे लिए अनुकरणीय है। उनके बताए सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है।
यह बात मील मंदिर में प्रवचन देते हुए जनसंत विरंजन सागर जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि इंसान को कल्पनाओं में जीवन व्यतीत नहीं करना चाहिए। कल्पना करने को तो की जाती है। लेकिन कल्पनाओं को साकार करना ही जीवन का लक्ष्य नहीं कहा जा सकता। हमें कल्पना से ज्यादा वर्तमान जीवन से प्रेम करना चाहिए। क्योंकि जिंदगी में कल्पना नहीं सत्य छिपा बैठा है। कहानी पढऩे से सत्य मिले या मिले पर जिंदगी को पढऩे से सत्य अवश्य मिल सकता है। वहीं क्षुल्लक विषौम्य सागर जी महाराज ने भी भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में मानव को सत्य का सहारा नहीं छोडऩा चाहिए। इस जीवन का सार ही सत्य है।
सत्य पर ही जीवन टिका हुआ है। मानव को अपने पूरे जीवन में ऐसे काम करना चाहिए कि उसे हमेशा याद रखा जा सके। जीवन तो सभी को मिलता है। लेकिन वह जीवन क्या जिसकी कोई चर्चा हो। क्योंकि चर्या नहीं होने से चर्चा भी नहीं होती। जिसकी अच्छी चर्या होती है। उसकी हमेशा चर्चा होती है। यदि इस संसार में चर्चा करानी है तो चर्या को ठीक रखो। प्रवचनों के दौरान बडी़ संख्या में भक्तों की मौजूदगी रही।
दो दिवसीय होगे आयोजन: जनसंत विरंजन सागर जी महाराज के सानिध्य में आगामी 12 एवं 14 दिसंबर को विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है। आयोजन समिति के लोगों ने बताया कि आचार्य विराग सागर जी महाराज का 32 वां मुनि दीक्षा दिवस एवं क्षुल्लक विरंजन सागर महाराज का 34 वां अवतरण दिवस कार्यक्रम धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। जिसके तहत 12 तारीख को बडे़ बाबा विधान होगा। वहीं 14 तारीख को आचार्य श्री का पूजन एवं विशेष प्रवचनों का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने उपस्थित होने अपील की है।
जनसंत विरंजन सागर