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तपन से बचना है तो तप करो, तप का अर्थ इच्छाओं को रोकना है: विरंजन सागर

5 वर्ष पहले
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दशलक्षण महापर्व पर चल रहे आयोजन

भास्कर संवाददाता | खड़ेरी

खड़ेरी ग्राम में विरंजन सागर महाराज एवं विसौम्य सागर महाराज के सानिध्य में होने जा रहा दशलक्षण महापर्व के अवसर पर भगवान का अभिषेक, पूजन, शांतिधारा उत्साह के साथ की जा रही है। सैकड़ों इंद्र-इंद्राणी मिलकर भक्ति कर रहे हैं। इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि आज उत्तम तप का दिन है।

दुनिया में सब की दृष्टि दूध में घी नजर आ रहा है लेकिन दुग्ध को गर्म करने के लिए बर्तन तपाना पड़ता है। शरीर को नहीं सुखाया जाता है कसाय को सुखाना ही तप है। तपन से बचना है तो तप करो। तप का अर्थ इच्छाओं को रोकना है। मनुश्री ने कहा जो इच्छाओं का निरोध कर लेता है वही महातपस्वी कहलाता है। बिना तपे स्वर्ण शुद्ध नहीं होता है। मिट्टी कलश नहीं बनता। उसी प्रकार बिना तपे आत्मा शुद्ध दशा अर्थात परमात्मा को प्राप्त नहीं होती। जीवन को तमाशा नहीं तीर्थ बनाना है। तन मात्र से तपस्या नहीं करना तन के साथ मन से करना है। वही तीर्थ बनता है। तप का मतलब जीवन शैली में परिवर्तन आना है। तप शक्ति के अनुसार किया जाता है।

चैत्यालय मंदिर में आयोजन: दमोह। मोरगंज गल्ला मंडी स्थित श्री तारण तरण दिगंबर जैन चैत्यालय मंदिर में पर्यूषण पर्व के चलते सोमवार को अमर पाटन से पधारे पं. राजेंद्र कुमार जैन ने मंगल प्रवचन दिए। जिसमें उत्तम तप धर्म के बारे में वृत्तांत से बताया कि भारतीय संतो का आदर्श उनका तपमय जीवन है, प्राचीन काल से ही तपस्या के द्वारा महापुरूषों ने भारत की आध्यात्मिक परपंरा को गौरवान्वित किया है।

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