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जिले में स्वाइन फ्लू के दो केस, जांच के लिए नहीं किट
जिलेमें भी स्वाइन फ्लू के दो मरीज पाए गए हैं। दोनों मामले दमोह जिले के हैं लेकिन यहां दोनों मरीज अलग-अलग जगह भोपाल और जबलपुर में इलाज करा रहे हैं। एक मामले में स्वास्थ्य विभाग ने दमोह के अधिकारियों को स्वाइन फ्लू पीडि़त मरीज के परिजनों के सेंपल लेकर जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। लेकिन जांच सेंपल लेने के लिए दमोह में विभाग के पास किट नहीं होने से अब तक चिन्हित परिवार के जांच सेंपल नहीं लिए जा सके हैं। ऐसे में स्वाइन फ्लू के फैलने का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि स्वास्थ विभाग ने जांच किट बुला ली है। दमोह के स्टोर में स्वाइन फ्लू की जांच किट उपलब्ध हो जाएंगी।
केस 1
शहरके नयाबाजार नंबर 1 धगट चौराहा निवासी 40 वर्षीय ऋषि धगट को स्वाइन फ्लू से पीडि़त होने के कारण भोपाल के अक्षय हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। ऋषि कुछ दिन पहले किसी शादी समारोह में शामिल होने के लिए भोपाल गए थे जहां बीमार होने पर उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया था। ऋषि में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए थे। इस पर उनकी जांच कराई गई। आईडीएसपी मप्र द्वारा 7 फरवरी को जारी की गई जांच रिपोर्ट में मरीज को स्वाइन फ्लू पॉजीटिव होने की पुष्टि हुई। साथ ही जांच रिपोर्ट संबंधी दस्तावेज दमोह स्वास्थ्य विभाग को भी भेजे गए हैं। दमोह स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया विभाग को निर्देश जारी किए है कि स्वाइन फ्लू पॉजीटिव मरीज के परिजनों की तत्काल जांच कराई जाए।
केस2
दूसरामामला जिले के पटेरा ब्लाक के हरपालपुर गांव का है। जहां रहने वाले मुकेश सोनी की 30 वर्षीय प|ी शारदा सोनी में स्वाइन फ्लू के लक्षण मिले हैं। शारदा कुछ दिनों से बीमार थीं। एक निजी अस्पताल में इलाज कराने पर जब डॉक्टर को स्वाइन फ्लू के लक्षण पता चले तो उन्होंने तुरंत शारदा को जबलपुर मेडिकल कॉलेज रैफर कर दिया। 6 फरवरी की रात शारदा के सीने में तेज दर्द हुआ और सांस लेने में जब तकलीफ हुई तो उसे इलाज के लिए दमोह के एक निजी अस्पताल लाया गया। इसके बाद शारदा को तुरंत जबलपुर रैफर कर दिया गया। हालांकि शारदा की जांच रिर्पोट अब तक दमोह नहीं आई है। शारदा का इलाज जबलपुर में ही चल रहा है।
बी-2 कैटेगरीमें भी तेज बुखार, गले में तेज दर्द होता है। यह गर्भवती महिलाओं, लंग्स, हार्ट, कैंसर, लीवर, किडनी पेंशेंट के लिए है। इसमें मरीजों को दवा के साथ डॉक्टर की सलाह से िवशेष सावधानी बरतनी की जरूरत है।
बी-1
मेंतेज बुखार, गले में तेज दर्द और खराश। इसमें टेमी फ्लू दवा ले सकते हैं।
दवा डॉक्टर्स की सलाह से, टेस्ट की जरूरत नहीं
दवा टेस्ट जरूरी
तेजबुखार, सांस में परेशानी, छाती में दर्द, ब्लड प्रेशर में उतार चढ़ाव, नाखून नीले, थूक में खून। इन लक्षणों के आने पर तुरंत टेस्ट कराएं। डॉक्टर की सलाह से तुरंत अस्पताल में भर्ती हों।
सेंपल लेने के निर्देश पर यहां जांच किट ही नहीं
भोपाल में स्वाइन फ्लू का इलाज करा रहे ऋषि के मामले में संचालनालय स्वास्थ भोपाल से सीएमएचओ कार्यालय दमोह को मेल भेजा गया है कि ऋषि के परिजनों के तुरंत सेंपल लेकर उन्हें जांच के लिए जबलपुर आईडीएसपी भेजा जाए। लेकिन दमोह में मलेरिया विभाग के पास स्वाइन फ्लू जांच किट नहीं है। इससे विभाग सोमवार की शाम तक जांच सेंपल नहीं ले पाया है। ही उस परिवार के बारे में भी स्वास्थ विभाग कोई जानकारी कर पाया है। जिला मलेरिया अधिकार डॉ. पीसी स्वर्णकार का कहना है कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग से ईमेल के जरिए सूचना मिली है कि भोपाल में इलाजरत ऋषि स्वाइन फ्लू पॉजीटिव है और इसके परिवार के अन्य सदस्यों के जांच सेंपल लिए जाने हैं। सेंपल एकत्र करने वाली जांच किट अभी यहां नहीं थी। भोपाल से किटें मंगाई गई हैं। देर रात तक दमोह के स्टोर में वे पहुंच जाएंगी। मंगलवार को संबंधित परिवार के जांच सेंपल एकत्र करके जांच के लिए भेज दिए जाएंगे।
जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू के सी श्रेणी के रोगियों को भर्ती कर इलाज के लिए अलग से आईसोलेशन वार्ड में सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यहां के प्रभारी डॉ. प्रहलाद पटेल ने बताया कि अस्पताल में स्वाइन फ्लू से इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है। अस्पताल के स्पेशल वार्ड में केवल सी कैटागरी के मरीज को भर्ती करने की व्यवस्था रखी गई है। संभावित स्वाइन फ्लू रोगी को गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों में बाटा है। सामान्य सर्दी-जुकाम से पीडि़त रोगी को श्रेणी के अंतर्गत-सर्दी-जुकाम एवं तकलीफ अनुसार दवा दी जा कर घर पर आराम करने की सलाह दी जाती है। वही ऐसे रोगी जिन्हें तेज बुखार, गले में खराश, खांसी हाथ-पैर में दर्द, सिर दर्द, उल्टी अथवा दस्त की तकलीफ से ग्रसित रोगियों को बी श्रेणी में शामिल कर स्वाइन फ्लू का इलाज औषधि टेमीफ्लू दी जाकर मरीज को घर पर आराम करने की सलाह दी जाती है। जबकि बी श्रेणी के लक्षणों के साथ-साथ श्रेणी सी के अंतर्गत सॉस लेने में तकलीफ छाती में दर्द, खकार में खून आना नाखून नीले पडऩा आदि लक्षणों वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर स्वाइन फ्लू का नि:शुल्क इलाज किया जाता है।
स्वाइन फ्लू के बढ़ते खतरे को दिखते हुए जिला अस्पताल में खुला वार्ड
टेमी फ्लू दवा की जरूरत, टेस्ट की
} हल्का बुखार, खांसी, गले में हल्का दर्द।
}दवा और स्वाइन फ्लू के टेस्ट की जरूरत नहीं।
}घर के बाहर नहीं निकलें और एहतियात के तौर पर डॉक्टर को दिखा सकते हैं।