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इंसानियत के रिश्ते ने बचाया जीवन, अब परिवार से भी मिलाएंगे

6 वर्ष पहले
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जिलाअस्पताल में तीन महीने पहले घायल हालत में पहुंचे एक अनजान किशोर को तो वे जानते थे और ही उन्हें उसका नाम पता था। लेकिन लावारिश बच्चे को तड़पता देख कुछ लोगों में ऐसी इंसानियत जागी कि वे बेसहारा अप्पू का खुद सहारा बन गए। इंसानियत का रिश्ता कायम हुआ तो उसे अप्पू नाम भी दे दिया। अप्पू की हालत सुधरी तो कोशिश करके उसका घर-परिवार का पता भी तलाश लिया। अब जब अप्पू का स्वास्थ्य कुछ ठीक हो गया तो इंसानियत के यह फरिश्ते अप्पू को उसके बिछड़े माता-पिता के पास भी पहुंचाने जा रहे हैं।

मतलब और स्वार्थ की दुनिया में जब लोग इंसानियत को आत्मसात कर लेते हैं तो वे ही लोग जरूरतमंद के लिए फरिश्ते बन जाते हैं। ऐसे ही लोग जिला अस्पताल में तीन महीने पहले भर्ती हुए 15 वर्षीय अप्पू के लिए फरिश्ते बन गए हैं। कोलकाता प्रांत का निवासी अप्पू मानसिक रूप से कमजोर है और उसे हिंदी भाषा भी नहीं आती है। ट्रेन से गिरकर घायल हो जाने के कारण उसका हाथ टूट गया था। पुलिस ने उसे जिला अस्पताल लाकर पटक दिया। इस बीच जिला अस्पताल में ही अलग-अलग काम करने वाले राजेश चौबे, हनीफ खान, शरद अग्रवाल, मुन्ना भाई, शहजाद, राजेश बाल्मीकि और नितिन तिवारी ने मिलकर अप्पू की देखभाल शुरू कर दी। अप्पू की पीड़ा को इन्होंने इशारों में समझा और उसे अपनी बात भी इशारों में समझाई। बाद में इन सभी ने अप्पू से इंसानियत का रिश्ता कायम कर लिया। अस्पताल प्रबंधन ने एक महीने पहले ही अधूरा इलाज छोड़कर अप्पू की छुट्टी कर दी और उसे भगवान भरोसे छोड़ दिया। लेकिन राजेश चौबे और उनके साथियों की टीम ने अप्पू को अपने जिम्मे ही जिला अस्पताल में रखकर उसका इलाज कराया। अप्पू की दवाओं से लेकर खाने-पीने और उसके पहनने के लिए नए कपड़ों तक का इन लोगों ने इंतजाम किया। इन सभी लोगों ने हर दिन उसको सुलभ शौचालय में नहलाकर तैयार करने का भी बीड़ा उठाया। दो दिन पहले डाक्टरों ने जब अप्पू को जिला अस्पताल से निकाल दिया तो इन लोगों ने अप्पू के घर का पता करके उसे उसके घर पहुंचाने का फैसला कर लिया। नितिन तिवारी ने बताया कि अप्पू कोलकाता के आंदूल जिला हावड़ा निवासी अब्दुल और बुलबुल का बेटा है।

बेटी खबर सुनते ही बिलख पड़ी मां

जबअप्पू की मां बुलबुल को लोगों ने उनके बेटे के बारे में बताया तो बेटे के लिए परेशान मां फोन पर ही बिलख उठी। बेटे की मिलने की खुशी के साथ ही वे दमोह के इन इंसानी फरिश्तों को दुआओं से नवाजती रहीं। नितिन ने बताया कि उन सभी लोगों ने अापस में रुपए एकत्र करके अप्पू को दो लोगों के साथ कोलकाता भेजने के लिए किराए की व्यवस्था कर ली है। दो-तीन दिन में अप्पू को उसके घर पहुंचा देंगे।

असहाय लावारिस अप्पू को दमोह के इंसानी फरिस्तों ने दिया सहारा।