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विधान का समापन 11 फरवरी को

6 वर्ष पहले
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दमोह | शहरके दिगंबर जैन नन्हें मंदिर में णमोकार महामंत्र विधान पूजन के आयोजन से भक्तिभाव में माहौल बना हुआ है। आचार्य बसुनंदी जी महाराज की सुयोग्य शिष्या आर्यिका माता के सानिध्य में प्रारंभ हुए इस विधान का समापन 11 फरवरी को किया जाएगा। सोमवार को विधान के ग्यारहवें दिन भी श्रावकगणों द्वारा विधान पूजन करते हुए अर्ध्य चढ़ाए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं सहित भक्तजनों द्वारा विधान पूजन किया गया।जैन धर्मषाला में पिछले कुछ दिनों से आचार्य बसुनंदी जी महाराज की सुयोग्य शिष्याएं दो आर्यिका माताएं विराजमान हैं। जिनके सानिध्य में दिगंबर जैन नन्हें मंदिर जी में विविध धार्मिक आयोजनों का दौर लगातार जारी है। साथ ही मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की वेदी के समक्ष पिछले दस दिनों से णमोकार महामंत्र विधान का आयोजन चल जा रहा है।

सुबह सात बजे से प्रारंभ होने वाले विधान के दौरान प्रतिदिन सौधर्म इंद्र बनकर श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रावकजन अर्जित कर रहे है। इस दौरान इंद्रो द्वारा भक्तिभाव के साथ नाचते-झूमते हुए नमोकार मंत्र की आराधना की जा रही है। णमोकार विधान पूजन के ग्यारहवें दिन सोमवार को सौधर्म इंद्र बनकर श्रीजी का प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य सिंघई रतनचंद, राजेंद्र अटल के परिवार ने प्राप्त किया। वहीं शांतिधारा करने का सौभाग्य लुहर्रा वाले विजयकुमार जैन के परिवार ने अर्जित किया। अभिशेक शांतिधारा के उपरांत आर्यिका माता के सानिध्य में ब्रहम्चारी दीदी, स्वतंत्र भैया तथा नवीन निराला द्वारा विधान कराया गया। वहीं श्रावकजनों द्वारा बारी-बारी से अध्र्य चढ़ाकार भक्तिभाव से विधान पूजन को संपंन किया गया। विधान अवसर पर मगलवार 10 फरवरी को सौधर्म इंद्र बनकर श्रीजी का अभिशेक करने का सौभाग्य चक्रेष सराफ परिवार द्वारा अर्जित किया गया है। वहीं 11 फरवरी को आर्यिकाश्री के सानिध्य में तेरह दिवसीय विधान के समापन उपरांत दोपहर में हवन का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति द्वारा सभी जैन बंधुओं से दिगंबर जैन नन्हें मंदिर पहंुचकर णमोकार महामंत्र विधान के पुण्यार्जन का आह्वान किया है।