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रचनाएं पढ़कर वसंत का आगाज किया

6 वर्ष पहले
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स्थानीय बूंदाबहु मंदिर परिसर में बसंत पंचमी के अवसर पर बसंत पर्व मनाया गया। इस अवसर पर परपंरानुसार श्रेष्ठ रचनाकारों और कवियों ने मां सरस्वती को अपनी काव्यांजलि अर्पित कर आशीर्वाद लिया। आयोजन के प्रथम सत्र में हंसवाहिनी का प्रकटोत्सव मनाते हुए वैदिक मंत्रों के साथ उनका पूजन अर्चन मंदिर के पुरोहितों के द्वारा कराया गया। द्वितीय सत्र काव्याजंलि के साथ प्रारंभ हुआ जिसने प्रारंभ से ही वातायन को श्रंृगारमय कर दिया। अध्यक्षता करते हुए पूर्व डीईओ डॉ. पीएल शर्मा ने सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को स्मरण कर उनकी जयंती पर्व होने के उपलक्ष्य में निराला को समर्पित रचना पढ़ी। संचालन कर रहे इंजी अमर सिंह राजपूत ने समस्या पूर्ति समरसता बसंत में पर कवियों से रचनाएं आमंत्रित करते हुए अपनी रचना पढ़ी कि फूले-फलें सब साथ मिलकर फैले संदेश दिग दिगंत में समरसता हो सब में ऐसी जैसी होती समरसता संत में। डॉ. चिले ने मौसम है बहारो का यह रंगीनी बिखर रही है। प्रकृति का हुआ है, श्रंगार, रौनक बिखर रही है रचना पढ़ी। रमेश तिवारी ने सुरक्षित बहने लगी बयार, थपकियां देती मन के द्वार, बीएस दुबे ने ऋतुराज है। बसंत खुशियां रहें अनंत मां वीणापाणी कृपा सभी पर कीजिए। आलोक पांडे ने बहुत दिनों बाद जब आया मधुमास। महेंद्र श्रीवास्तव ने सांसों में आस न ही, आंहों में तुम्ही तुम हो। डाॅ. गणेश राय ने साहूकार के दियों में किसान को खून जर रओ। कालूराम नेमा ने श्रीकंत बसंत रूप प्यार से मुस्कान है। राजकुमार तिवारी ने हे मां शारदे ऐसा वर तंू दे, हेमलता दुबे ने छाया उल्लास जगी उमंग अंग अंग में रचना पढी। गोविंद मिश्रा पथिक चतुर्वेदी और आराधना राय ने भी अपनी कविता पढी़। अंत में बूंदाबहु मंदिर ट्रस्ट कमेटी की ओर से प्रेमलता अग्रवाल ने आभार माना। कार्यक्रम में राजू अठ्या, जागेश्वर बुधौलिया, हरि मिश्रा, प्रकाश दुबे, मुकुंद पाठक, साब बृज बिहारी असाटी, ओमप्रकाश असाटी, ठाकुर मासाब, पुजारी पाठक और गरिमा राय मौजूद रही।