सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ नोहटा महोत्सव का समापन
बनवार/नोहटा| दो दिवसीय नोहटा नोहलेश्वर महोत्सव का समापन लोक कला संस्कृति की मनमोहक रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ हुआ। कार्यक्रम तीन चरणों में हुआ। जिसमें प्रथम चरण में क्षेत्रीय प्रतिभागियों, द्वितीय चरण जिला स्तर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी गई। वहीं तीसरे चरण में प्रदेश के विशेष आमंत्रित कलाकारों के द्वारा अपनी कला का जलवा दिखाया गया।
दूसरे दिन की प्रस्तुतियों में प्रस्तुतियों में लोक रंग दर्पण कला केंद्र के फूलों की होली नौरता, दमोह डांस एकडेमी का कृष्ण अवतार, शुवी डांस गुप की गणेश वंदना एवं तारना गुप जबलपुर की महिषासुर मर्दनि एवं शिव महिमा की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसके साथ ही अंतिम कार्यक्रम में दमोह के संगीताचार्य रविकांत वर्मान के शिष्य संतोष कुमार अठ्या ने इलेक्ट्रानिक गिटार की आनंदमयी प्रस्तुति दी। उनके साथ अकॉस्टिक गिटार पर उनके पुत्र तरूण अठया एवं तबले पर राजाराम श्रीवास्तव ने संगत दी। कार्यक्रम का समापन डा. एलएन वैष्णव द्वारा मशहूर गीत जाने कहां गए वो दिन की प्रस्तुति के साथ हुआ। यह प्रस्तुति कार्यक्रम के संस्थापक स्व. र|ेश साॅलोमन की याद में महेंद्र कपूर एवं स्व. अजीत श्रीवास्तव को समर्पित थी। आभार आदित्य सॉलोमन ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के आयोजक विधायक प्रताप सिंह, राघवेंद्र सिंह व नोहटा महोत्सव समिति द्वारा का विशेष सहयोग रहा। नृत्य में लोक संस्कृति पर आधारित झांकी बनाई गई। इस दौरान करीब पांच हजार दर्शक मौजूद रहे।
बनवार। शुभि डांस ग्रुप के कलाकारों द्वारा गणेश वंदना प्रस्तुत की गई।