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रिटायर्ड डीडीए ने 60 मवेशियों से चालू की थी डेयरी अब 500 हो गए, 1500 लीटर दूध रोज बेचते हैं
शहर से सटे ग्राम हिरदेपुर के रिटायर्ड कृष उप संचालक .डीडीए. घनश्याम प्रसाद पटेल को उनके द्वारा तैयार की गई डेयरी फार्मिंग ने जिले भर के किसानों का रोल मॉडल बना दिया है। डेयरी फार्मिंग उनके लिए एक बेहतरीन रोजगार का साधन साबित हो रही है। उन्होंने पहले मात्र 60 मवेशियों से डेयरी प्रारंभ की थी, जो आज बढ़कर 500 हो गए हैं।
खास बात यह है कि उन्होंने डेयरी फार्मिंग स्थापित करके खुद तो रोजगार पाया ही साथ में बिहार और मप्र के 40 लोगों को रोजगार भी दिया है। श्री पटेल की सफलता को देखते हुए कलेक्टर के आदेश पर अब उनकी कार्यप्रणाली दूसरे किसानों को दिखाने के लिए एग्री कल्चर विभाग, वेटरनरी विभाग और हॉर्टीकल्चर विभाग के अधिकारी डेयरी फार्मिंग पर डेमो दिखाने के लिए ला रहे हैं।
हरियाणा के करनाल में देखा और अपनाया
65 वर्षीय श्री पटेल ने बताया कि उन्होंने विजिट के दौरान हरियाला के करनाल में डेयरी फार्मिंग का डेमो देखा था, वहां पर हर परिवार में डेयरी का धंधा होता है, कोई भी व्यक्ति फ्री नहीं बैठता है। उनके डेयरी संचालित करने के तरीके को देखकर उन्होंने निर्णय लिया कि वे भी यही धंधा करेंगे और रिटायर्ड होने के बाद डेयरी प्रारंभ कर दी। उन्होंने घास काटने, भूसा मिलाने और दाना पीसने के प्लाट भी डेयरी में स्थापित कर लिया है। जिले की एक मात्र डेयरी फार्मिंग का डेमो देखने के लिए अब तक जिले भर से एक हजार से ज्यादा किसान आ चुके हैं। विजिटर बुक में किसानों ने डेयरी फार्मिंग से सीख लेने का जिक्र किया है। श्री पटेल ने बताया कि उन्होंने श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन के जीवन से प्रेरित होकर यह पहल की है। क्या कहते हैं अधिकारी इस संबंध में वेटरनरी विभाग के उप संचालक डॉ. विनोद वाजपेयी ने बताया कि डेयरी संचालक श्री पटेल डेयरी फॉर्मिग में बेहतर कार्य कर रहे हैं। विभाग द्वारा उन्हें समय पर जानकारी मुहैया करवाने के साथ-साथ कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी दी जा रही है। उन्होंने निजी अौर फाइनेंस स्रोत जोड़कर डेयरी फार्मिंग तैयार की है।
लेते हैं तीन गुना लाभ
श्री पटेल ने डेयरी फार्मिंग में तीन गुना लाभ लेते हैं। उन्होंने जो गौशाला बनाई है, उनमें छोटी-छोटी नालियां बना रखीं हैं। मूत्रालय सहित धुलाई का पानी नालियों के माध्यम से एक बड़े नाला में पहुंचता है, जहां उसे डेयरी फार्मिंग के पीछे बने 20 एकड़ खेत में पहुंचाया जाता है। जिससे 13 एकड़ में लगी बर्सिंग. घास. 10 हजार सागौन और 5 हजार नीबू के पेड़ों की सिंचाई होती है।
बिहार से बुलवाए एक्सपर्ट
श्री पटेल ने बताया कि वर्तमान में करीब 500 में से 150 भैंसे दूध दे रहीं हैं। इन्हें लगाने के लिए स्थानीय मजदूर नहीं मिल रहे थे। ऐसे में उन्होंने बिहार से 10 मजदूरों को बुलवाया है, जो सुबह और शाम को भैंसों को लगाते हैं, एक मजदूर को हर महीने 10 हजार रुपए का वेतन देते हैं। इस तरह मवेशियों के रखरखाव के लिए 35 लोगों को काम पर रखा है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग 1500 लीटर दूध बेचते हैं, जिसमें से आधा दूध घर से बिकता है जबकि आधा दूध सागर टैंकर के माध्यम से भेजा जाता है। श्री पटेल की खास बात यह है कि वे दूध में एक बूंद पानी तक नहीं मिलाते हैं।
1. प्लांट में दूध कूलिंग कराते डेयरी संचालक घनश्याम पटेल। 2. दूध डेयरी में भैंसों का दोहन करता कर्मचारी। 3. जानवरों के लिए घास/ वर्शिंग काटते हुए।