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अब कम्प्यूटर पर लिखी जाएगी एफआईआर, हाईटेक होंगे थाने
दस वर्ष तक का पुराना रिकार्ड होगा ऑन लाइन
आर.कुमार जोशी| दतिया
अबवह दिन दूर नहीं जब वर्षों पुरानी केस की फाइल माउस क्लिक करते ही सामने होगी। यह सब संभव होगा सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग सिस्टम) से। शीघ्र ही यह सिस्टम पूरे देश में शुरू होगा। भारत की ई-गवर्नेंस योजना के तहत पूरे देश में पुलिस की व्यवस्था को दुरुस्त करने और कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए सभी थानों को कम्प्यूटराइज्ड किया जा रहा है। थानों के हाईटेक होते ही हर तरह का रिकार्ड आनलाइन हो जाएगा। इस सिस्टम के जरिए वर्तमान का रिकार्ड ही नहीं बल्कि दस साल पुराना रिकार्ड भी आनलाइन दर्ज किया जाएगा।
वर्तमान पुलिस व्यवस्था में अधिकतर काम मैनुअल तरीके से हो रहा है। जिसमें अपराधों और अपराधियों से संबंधित सभी काम, रोजनामचा, रजिस्टर, केस डायरी, रिकार्ड, साक्ष्य संकलन जैसे काम हस्तलिखित तरीकों से किए जा रहे हैं। कम्प्यूटरीकरण के कारण पुलिस की कार्यप्रणाली में बदलाव होगा।
जवानों को कर रहे प्रशिक्षित
Ãथानोंकोशीघ्र ही हाईटेक किया जाएगा। इसके लिए कार्रवाई चल रही है। पुलिसकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जयवीरसिंह भदौरिया, नोडलप्रभारी सीसीटीएनएस
रिकार्ड संधारण के लिए बनाए सर्वर
रिकार्डको संधारित करने के लिए तीन अलग-अलग स्थानों पर सर्वर बनाए हैं। जहां प्रत्येक पुलिस थाने का रिकार्ड संधारित किया जाएगा। इसमें एक डाटा स्टेट अपराध ब्यूरो भोपाल, दूसरा एनसीआर (नेशनल क्राइम रिकार्ड) दिल्ली एवं पूना में संपूर्ण देश के थानों का रिकार्ड संधारित रहेगा। इसके अलावा थानों पर भी रिकार्ड उपलब्ध रहेगा।
यह होंगे फायदे
{पिछलेदस वर्ष का रिकार्ड आन लाइन किया जाएगा। जिससे पुराना अपराधी भी सभी पुलिस अधिकारियों की नजर में रहेगा, उसे पकड़ने में आसानी होगी।
{ सभी थानों की आपस में कनेक्टिविटी बनी रहेगी।
{ थाना पर तैनात स्टाफ को कागजी कार्रवाई से छुटकारा मिलेगा।
{ मोटर व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम, लापता व्यक्तियों, अज्ञात व्यक्ति के शव आदि की जानकारी आन लाइन रहने से शीघ्र जानकारी लगेगी।