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एप्को बदलेगा हमारे तालाबों की सूरत

7 वर्ष पहले
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एप्को(पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन) के सहयोग से प्रशासन बदहाल हो रहे तालाबों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार कर रहा है। चार माह पहले इप्को के वैज्ञानिक तालाबों का निरीक्षण कर चुके हैं। शीघ्र एक इंजीनियरों का दल तालाबों का निरीक्षण कर इनके सौंदर्यीकरण एवं विकास की योजना तैयार करेगा।

मालूम हो कि लगभग चार करोड़ की लागत से शहर के सीतासागर, लाला के ताल करन सागर का सौंदर्यीकरण पर्यटन विभाग द्वारा किया जा चुका है। बावजूद इसके तालाब बदहाली का शिकार हैं। सीतासागर अगर जलीय पेड़-पौधों से पट गया तो लाला के ताल का पानी खराब हो चुका है। घाटों पर पसरी गंदगी ने लोगों को तालाब से दूर कर दिया। बदहाल हो रहे तालाबों की तस्वीर बदलने के लिए प्रशासन तालाबों को इप्को से सहयोग की तैयारी कर रहा है।

पर्यावरण संरक्षण इकाई है एप्को

पर्यावरणनियोजन एवंं समन्वय संगठन शासन की इकाई है। संगठन द्वारा प्रदेश में पर्यावरण, पर्यटन एव पुरातत्व महत्व के स्थानों का विकास किया जाता है। संगठन निरीक्षण के बाद इनके विकास के लिए पैसा उपलब्ध कराता है।

पानी का परीक्षण किया

लगभगचार माह पहले एप्को ने तालाबों के निरीक्षण के लिए एक वैज्ञानिक को भेजा था। वैज्ञानिक ने तालाबों के पानी का परीक्षण कराया। फोटो खींच कर साथ ले गए। वैज्ञानिक ने तालाबों के विकास की संभावनाएं व्यक्त की।

इंजीनियरोंका दल आएगा: तालाबोंके निरीक्षण के लिए शीघ्र ही इप्को के इंजीनियरों का दल दतिया आने वाला है। तालाबों के निरीक्षण के बाद इंजीनियर योजना तैयार करेंगे। हाल ही में एक जनवरी को नपा के एई अरुण नामदेव ने भोपाल जाकर एप्को के अधिकारियों से भी संपर्क किया। अधिकारियों ने उन्हें शीघ्र दल भेजने का आश्वासन दिया।

गंदगी से पटा लाला का तालाब।