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छह साल पहले मिला तहसील का दर्जा, सुविधाएं अब तक नहीं मिलीं

5 वर्ष पहले
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शासन स्तर से नहीं हो रही कार्रवाई, लोग परेशान

भास्कर संवाददाता | इंदरगढ़

दतिया जिले में स्थित इंदरगढ़ को तहसील का दर्जा मिले छह साल हाे चुके हैं। लेकिन अभी तक मुख्यालय पर सभी विभागीय कार्यालय प्रारंभ नहीं हो सके हैं। इन विभागों में शामिल ट्रेजरी कार्यालय का यहां न होना ग्रामीणों को सबसे परेशान करता है। इसके अलावा आरआई व एसएलआर भी यहां नियमित नहीं है। जिस कारण सैकड़ों ग्रामीणों को अपने छोटे से छोटे कामकाज के लिए 30 से 45 किमी दूर स्थित दतिया सेंवढ़ा जाना पड़ता है।

सेंवढ़ा अनुभाग में स्थित इंदरगढ़ को 26 अगस्त 2009 को पूर्ण तहसील का दर्जा दिया गया था। इसके बाद यहां तहसील कार्यालय को नियमित चलने लगा लेकिन अन्य विभागीय कार्यालयों की स्थापना छह साल बाद भी नहीं हो सकी है। खास बात यह है कि दतिया जिले में शामिल सेंवढ़ा अनुभाग की इंदरगढ़ तहसील राजस्व ग्रामों में सेंवढ़ा से भी बढ़ी है। सेंवढ़ा तहसील में केवल 111 गांव हैं और इंदरगढ़ तहसील में 115 गांव। साथ ही 51 पटवारी हल्कों के साथ तीन आरआई वृत्त शामिल हैं। इसके बाद भी शासन द्वारा यहां व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। इंदरगढ़ तहसील मुख्यालय पर ट्रेजरी का खाता नहीं है। यह खाते केवल जिला मुख्यालय दतिया व सेंवढ़ा तहसील मुख्यालय की बैंकों में हैं। इंदरगढ़ तहसील के राजस्व ग्रामों की बसाहट तकरीबन 25-30 किमी में फैली है। प्रमाण के तौर पर ग्राम भदौना इंदरगढ़ से 25 किमी दूर है।

वहां रहने वाले किसान को भू-ऋण अधिकार पुस्तिका बनवाने के लिए ट्रेजरी में जमा होने वाले दस रुपए के चालान के लिए सेंवढ़ा जाना पड़ता है। चालान से कहीं ज्यादा रुपया उसका किराए भाड़े में ही खर्च हो जाता है। इसके अलावा खाने पीने में भी रुपया बर्बाद होता है। इसी तरह सीमांकन कराने पर चालान ट्रेजरी में जमा करने के लिए हर कृषक को दतिया, सेंवढ़ा ही जाना पड़ता है। परिणामत: कृषक समय पर सीमांकन नहीं करा पाते और सीमांकन, बंटवारे के अभाव में कई जगह अनावश्यक झगड़े भी होते हैं।

हर आवेदन पर लगते हैं टिकट:वर्ष 2009 से पूर्ण अस्तित्व में आई तहसील इंदरगढ़ में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक एवं कृषकों की मांग पर कम्प्यूटर शाखा की सौगात से जहां कृषकों को खसरे की नकल मिलने की सुविधा तो है लेकिन नकल पर लगने वाले टिकट ट्रेजरी से मिलते हैं जिन्हें लेने के लिए सेंवढ़ा, दतिया जाना पड़ता है। या फिर दोगुने दामों में बिचौलियों से खरीदना पड़ता है। आय प्रमाण पत्र, मूल निवासी, डायवर्सन, नजूल की एनओसी के आवेदन देने या मूल प्रति प्राप्त करने पर ट्रेजरी टिकट लगाना आवश्यक होता है।

उप पंजीयक कार्यालय नहीं

तहसील कार्यालय इंदरगढ़ में उप पंजीयक कार्यालय के अभाव में कृषकों को बेहद परेशानी होती है। उन्हें हर छोटे बड़े क्रय विक्रय या अनुबंध पर रजिस्टर्ड कराने भी सेंवढ़ा या दतिया जाना हर कृषक की मजबूरी होती है। खास बात यह भी है कि सेंवढ़ा स्थित उप पंजीयक कार्यालय पर सेंवढ़ा क्षेत्र के 111 गांव तथा इंदरगढ़ के 115 गांवों का एक उप पंजीयक अधिकारी पर कार्य का दबाव अधिक होने के कारण कृषकों का अधिक समय के साथ अनावश्यक पैसा भी खर्च होता है। इंदरगढ़ तहसील कार्यालय पर रजिस्ट्रार कार्यालय बनने से क्षेत्र के लोगों को त्वरित कार्य होने की सुविधा तो मिलेगी ही साथ ही अलग अधिकारी होने से कार्य का दबाव कम होगा।

इन गांव के ग्रामीण सबसे ज्यादा परेशान

इंदरगढ़ तहसील 25 किमी क्षेत्र में फैली है। तहसील की सीमा से लगे ग्राम भदौना, सुनारी, चक पिपरा, तिलैथा, बागुर्धन सिद्धो, जौरा, बागपुरा, खाईखेड़ा सहित दर्जनों गांव तहसील मुख्यालय से 25 किमी दूर बसे हैं। इन गांव की दूरी सेंवढ़ा से 50 और दतिया से 60 किमी है।

इंदरगढ़ तहसील कार्यालय में काम के लिए पहुंचे लाेग।

छोटे से काम में पूरा दिन लग गया, पैसे भी हुए खर्च
मुझे अपनी भू-ऋण पुस्तिका के लिए 10 रुपए का चालान बनवाने के लिए दतिया जाना पड़ा। जिससे आने-जाने का किराया सहित 200 रुपए खर्च हो गए। साथ ही पूरा दिन इस छोटे से काम में लग गया। कालीचरण जाटव, निवासी ग्राम इकौना

इंदरगढ़ तहसील में सुविधाएं न के बराबर

इंदरगढ़ में तहसील को संचालित हुए छह साल बीत गए लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं। छोटे से काम के लिए भी सेंवढ़ा, दतिया भागना पड़ता है। ट्रेजरी ऑफिस और रजिस्ट्रार ऑफिस खोला जाना आवश्यक है । राजेश दांतरे, (नोटरी वकील) इंदरगढ़

सुविधाएं बढ़ाने सीएम से करूंगा चर्चा

इंदरगढ़ को तहसील का दर्जा दिलवाया है। अब यहां ट्रेजरी ऑफिस, रजिस्ट्रार ऑफिस और न्यायालय की स्थापना हेतु मुख्यमंत्री जी से चर्चा कर मांग करूंगा। साथ ही संबंधित विभागों को भी पत्र लिख रहा हूं। प्रदीप अग्रवाल, विधायक, सेंवढ़ा

मांग पर प्रस्ताव भेजा जाएगा

यह सही है कि विभिन्न मदों की शासकीय राशि जमा करने हेतु आम लोगों को सेंवढ़ा तथा दतिया जाना पड़ता है जो व्यावहारिक रूप से परेशानी का कारण है। इंदरगढ़ नगर परिषद क्षेत्र भी है। मांग करने पर प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति हेतु भेजा जाएगा। डीआर कुर्रे, एसडीएम सेंवढ़ा

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