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जेसीबी-ट्रैक्टरों से बन रही सड़कें

5 वर्ष पहले
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ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव की सांठगांठ, वरिष्ठ अधिकारी कर रहे नजरअंदाज

भास्कर संवाददाता | इंदरगढ़

सेंवढ़ा अनुभाग में स्थित ग्राम पंचायत सिकरी में लाखों रुपए की लागत से दो सड़कों का निर्माण जेसीबी और ट्रैक्टरों से कराया जा रहा है। दिनदहाड़े चल रही इन मशीनों की जानकारी विभागीय अधिकारियों को भी है लेकिन अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। खास बात यह है कि गांव के जॉब कार्डधारी मजदूर बेरोजगार बैठे हैं। सरपंच और सचिव मनमानी से इन सड़कों का निर्माण करा रहे हैं।

केंद्र सरकार ने दो फरवरी 2006 को मनरेगा योजना प्रारंभ की थी। योजना को प्रारंभ करने का मुख्य उद्देश्य गांव के बेरोजगार लोगों को गांव में ही 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना था। शुरुआत में इस योजना के तहत प्रति मजदूर 100 रुपए एक दिन की मजदूरी नियत थी। वर्तमान में यह मजदूरी बढ़ाकर 159 रुपए की गई है। इस योजना के प्रारंभ होने पर गांव-गांव में जॉबकार्ड बनाए गए थे। इस योजना को ग्राम पंचायतें जनपद अधिकारियों से मिलकर जमकर पलीता लगा रहे हैं। हालत यह है कि जॉब कार्डधारी मजदूर बेकार बैठे हैं। उनकी जगह मशीनों से निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार जनसुनवाई व अन्य मौकों पर अधिकारियों से इसकी शिकायत भी की जाती है लेकिन जनपदों में बैठे अधिकारी आपसी सांठगांठ कर लेते हैं। ग्राम पंचायत जनप्रतिनिधि फर्जी मस्टर डालकर जनपदों से भुगतान प्राप्त कर लेते हैं।

काम के लिए भटक रहे जॉबकार्डधारी
ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मुहैया कराने के लिए प्रारंभ की गई मनरेगा योजना का जॉबकार्ड धारियों को लाभ नहीं मिल रहा है। इस साल कम बारिश के कारण अधिकांश ग्रामीण बोवनी नहीं कर सके हैं। ग्रामीणों को रोजगार की तलाश में दतिया, सेंवढ़ा, इंदरगढ़ जाना पड़ रहा है। जबकि गांव में चल रहे निर्माण कार्यों में मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।शुक्रवार को भास्कर टीम ने ग्राम सिकरी में जाकर मौका देखा तो यहां जेसीबी से एक दर्जन ट्रैक्टरों में मिट्टी भरकर सड़क बनाई जा रही थी।

सिकरी में बन रही दो सड़कें
सेंवढ़ा अनुभाग में स्थित ग्राम पंचायत सिकरी में मनरेगा की खेत सड़क योजना के तहत हनुमान मंदिर से भगवानदास जाटव के मकान तक 700 मीटर सड़क का निर्माण 14 लाख 51 हजार और प्रधानमंत्री सड़क से रामकिशुन जाटव के खेत तक 750 मीटर सड़क का निर्माण 13 लाख नौ हजार की लागत से कराया जा रहा है। यह दोनों सड़कें जेसीबी से मिट्टी खोदकर बनाई जा रही हैं। शुक्रवार को दोपहर एक बजे तक 51 ट्राॅली मिट्टी सड़क निर्माण में डाली जा चुकी थी।

प्रशासनिक अधिकारी नहीं देते ध्यान-
ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी का जिम्मा जनपद पंचायत के कार्यपालन अधिकारी, उपयंत्री, जिला पंचायत अधिकारियों की होती है। लेकिन न तो जनपद पंचायत इस ओर ध्यान देती है और न ही जिला पंचायत के अधिकारी। खास बात यह है कि सड़क निर्माण बाद मस्टरों में फर्जी मजदूरों के नाम दिखाकर भुगतान भी प्राप्त कर लिया जाता है। ऐसा ही हाल सिकरी में खेत सड़क योजना के तहत बन रहीं दोनों सड़कों का है। सरपंच सचिव जनपद अधिकारियों से मिलकर भुगतान प्राप्त कर लेते हैं।

जेसीबी से काम होने पर करेंगे कार्रवाई
सिकरी पंचायत में जेसीबी से काम होने की जानकारी नहीं है। मैं इस संबंध में जानकारी लेकर दिखवाता हूं। अगर जेसीबी से काम चल रहा है तो कार्रवाई की जाएगी। विजय कुमार खेमरिया, सीईओ, जनपद सेंवढ़ा

करवाएंगे जांच

मनरेगा के निर्माण कार्यों को देखने की जिम्मेदारी संबंधित कलेक्टर की होती है। अगर किसी प्रकार की शिकायत हमारे पास आती है तो हम भी कलेक्टर को भेजकर दिखवाते हैं। आपने बताया है तो मैं कलेक्टर को मैसेज करता हूं। एमआर रघुराज, आयुक्त, मनरेगा

मशीन का उपयोग करना गलत

मनरेगा के निर्माण कार्यों में अगर मशीनों का उपयोग किया जा रहा है तो यह गलत है। आप मुझे मैसेज कर दो मैं दिखवा लेता हूं। मशीन से काम करवाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। मदन कुमार, कलेक्टर, दतिया

ग्राम सिकरी में जेसीबी से ट्रेक्टरों में मिट्‌टी भरकर सड़क बनाई जा रही है व दूसरे चित्र में जेसीबी ने मिट्‌टी खोदकर सड़क किनारे लगाया ढेर।

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