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अध्यक्षों के पास अपनी ही पार्टी के पार्षदों का टोटा, जोड़तोड़ से बनानी होगी पीआईसी
भाजपा के सामने निकायों में उपाध्यक्ष बनाने की चुनौती
दतिया, भांडेर, सेंवढ़ा इंदरगढ़ में चुनाव जीतकर आए अध्यक्षों के सामने विपक्षी दल के पार्षदों को साथ लेकर विकास कार्य कराने की चुनौती।
भास्करसंवाददाता| दतिया
निकायचुनाव संपन्न होने के बाद अब नगरपालिकाओं नगर पंचायतों में पीआईसी (प्रेसीडेंट इन कौंसिल) के गठन की तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन जिले की चारों निकायों दतिया, भांडेर, सेंवढ़ा इंदरगढ़ में अध्यक्षों के पास अपनी ही पार्टी के पार्षदों का टोटा है। ऐसे में उन्हें विपक्षी दलों के पार्षदों को परिषद में शामिल कर विकास कार्यों को कराने की चुनौती होगी।
मालूम हो कि नगर पालिका में सात नगर पंचायत में पांच सदस्यीय पीआईसी के गठन के अधिकार अध्यक्ष को होते है। दतिया नपा में अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल बसपा से जीते हैं लेकिन यहां बसपा का एक ही पार्षद चुनकर परिषद में पहुंचा है। इसी प्रकार नगर पंचायत भांडेर में कांग्रेस के बल्ले रावत जीते जबकि यहां कांग्रेस के पांच पार्षद ही जीते। इंदरगढ़ में बसपा के कोक सिंह मयंक अध्यक्ष पद पर जीते, लेकिन यहां तो बसपा का एक भी पार्षद विजयी नहीं हुआ। सेंवढ़ा में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय रानी शर्मा जीती हैं।
अध्यक्ष का वोट होता है महत्वपूर्ण
उपाध्यक्षपद के लिए अध्यक्ष द्वारा भी मतदान किया जाता है। निर्वाचित अध्यक्ष भी पूरे प्रयास में रहता है कि उपाध्यक्ष उसके पक्ष का बने। इसके लिए अध्यक्ष भी जोड़तोड़ करते हैं। उपाध्यक्ष के निर्वाचन में अध्यक्ष का वोट भी महत्वपूर्ण होता है।
> परिषद में किसी भी कार्य या मामले की स्वीकृति समय से नहीं मिलेगी।
> ढाई साल बाद अध्यक्ष के ऊपर अविश्वास प्रस्ताव आने का डर मड़राने लगेगा।
> किसी भी कार्य की स्वीकृति के लिए पार्षद अध्यक्ष पर दबाव बनाते रहेंगे।
> अध्यक्ष को समर्थन जुटाने के लिए पार्षदों के दबाव में कार्य करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
> अध्यक्ष के पास स्वयं की पार्टी का बहुमत होने से पार्षदों को अपने साथ मिला कर चलना होगा, जिससे नपा में भ्रष्टाचारी या गलत कार्यों को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं रहेगी।
> अध्यक्ष के विरोध में आने पर पार्षद शहर के विकास कार्यों को अटका सकते हैं।
पांच लाख तक की स्वीकृति देने का अधिकार
पीआईसीशहर में होने वाले दो से पांच लाख तक के विकास कार्यों को स्वीकृति दे सक