यहां दोपहर 12 बजे के बाद नहीं मिलता इलाज
वरिष्ठों को अवगत कराया
अस्पताल में नहीं मिलता इलाज
जिगना।जिला मुख्यालय से दस किमी दूर बड़ौनी में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दोपहर 12 बजे के बाद इलाज नहीं मिलता है। दूर दराज के गांव से आने वाले मरीजों को सरकारी इलाज की बजाए झोलाछाप से इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है। पेसा ही हाल शनिवार को देखने को मिला। दोपहर 12 बजे के बाद अस्पताल की सभी कुर्सियां खाली थीं। कोसों दूर से आए मरीज डॉक्टरों के न होने के कारण मायूस होकर लौट रहे थे।
बड़ौनी में वर्षों पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनकर तैयार हुआ था। वर्तमान में यहां तीन डॉक्टर और पांच नर्स तैनात हैं। लेकिन दोपहर 12 बजे के बाद अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं रहता है। दोपहर एक बजे ओपीडी बंद होने के बाद डॉक्टरों की कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं। केवल दो नर्सें ही यहां बैठी नजर आती हैं। शनिवार को भास्कर संवाददाता ने अस्पताल का जायजा लिया तो एक भी डॉक्टर नहीं था। पूछने पर यहां पदस्थ नर्स कमलेश्वरी लिलारे ने बताया कि अस्पताल में तीन डॉक्टर प्रभारी देवेंद्र सिंह राजावत, डाॅ. पूर्णा खरे और आयुर्वेद डॉ पूजा गुप्ता। इनमें से डाॅ. पूर्णा खरे 12 फरवरी को ट्रेनिंग पर चले गए। सुबह आने वाले डॉक्टर दोपहर 12 बजे ओपीडी बंद होने के बाद चले जाते हैं। खास बात यह है कि इस अस्पताल में बड़ौनी नगर के अलावा 29 गांव भी शामिल हैं। सैकड़ों लोग प्रतिदिन अस्पताल इलाज कराने के लिए आते हैं लेकिन डॉक्टर न मिलने के कारण उन्हें नगर में स्थित प्राइवेट दुकानों पर रुपया देकर इलाज कराना पड़ता है। शनिवार को बड़ौनी नगर से दस किमी दूर स्थित दभरीपमारी निवासी नीरज पाल बड़ौनी नगर में पढ़ने के लिए आया था। दोपहर में स्कूल में पढ़ाई करते समय उसे बुखार आ गया। नीरज इलाज कराने के लिए बड़ौनी अस्पताल गया तो डॉक्टर नहीं मिले जिस कारण उसे प्राइवेट दुकान पर ही इलाज कराना पड़ा।
अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती करने के बारे में हमने ऊपर के अधिकारियों को अवगत करा दिया है। वो जब भेज दें। कह नहीं सकते। डॉ. इंद्रेश दोहरे, प्रभारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसई
महिला डाॅक्टर की कमी, नर्स कराती हैं प्रसव
बसई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनने के बाद यहां एक भी महिला डॉक्टर पदस्थ नहीं की गईं। अस्पताल बनने के बाद से ही महिला डॉक्टर का पद खाली हैं। हालत यह है कि गर्भवती महिलाओं का प्रसव यहां पदस्थ नर्सों द्वारा कराया जाता है। गर्भवती महिला की ज्यादा हालत बिगड़ जाए तो फिर पुरुष डॉक्टरों को प्रसव कराने में मदद करनी पड़ती है या फिर मरीज को दतिया या झांसी रैफर कर दिया जाता है।
अस्पताल पर 30 गांव की जिम्मेदारी-
बसई अस्पताल में बसई सहित 11 पंचायतों के 23 ग्राम शामिल हैं। इनमें बसई, मकड़रारी, ठकुरपुरा, लखनपुर, बरधुवां, सतलौन, नयाखेड़ा, मुड़रा, उर्दना सहित 23 गांव के अलावा शिवपुरी जिले के नजदीक होने के कारण लहरा, हरीनगर, रेवई, माधौन, सांकुली सहित सात गांव भी इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। इसके बाद भी यहां सुविधाओं का टोटा है। मरीज के परिजन परेशान होते रहते हैं।
बड़ौनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंदर खाली पड़ी डॉक्टर की कुर्सियां।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नहीं हैं डॉक्टर।