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सप्ताह में 1 दिन आते हैं तहसीलदार, ग्रामीण शिकायत लेकर आएं तो डाटकर भगा देते हैं

5 वर्ष पहले
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दो साल पूर्व टप्पा तहसील का दर्जा दिया गया था बसई को

बसई के सैकड़ों ग्रामीण परेशान, 70 किमी दूर दतिया जाने को मजबूर

भास्कर संवाददाता | बसई

दतिया जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर स्थित ग्राम बसई। ग्रामीणों को गांव में ही सुविधाएं मिलें। इसके लिए करीब दो साल पूर्व बसई को टप्पा तहसील का दर्जा दिया गया था। इसके बाद यहां सप्ताह में दो दिन नायब तहसीलदार व एक दिन तहसीलदार को बसई में बैठने का दिन नियत किया गया था। शुरुआत में नायब तहसीलदार यहां रुकते थे लेकिन अब नायब तहसीलदार ने यहां आना बंद कर दिया है। वर्तमान में तहसीलदार दीपक शुक्ला सप्ताह में एक दिन गुरुवार को बसई में आते हैं। लेकिन वे भी चाय नाश्ता करके समय निकालकर चले जाते हैं। ग्रामीण समस्याएं लेकर आते हैं तो तहसीलदार उनकी समस्याएं सुनने की बजाए फिर कभी आने की बात कहकर टरका दिया जाता है। ऐसा ही नजारा गुरुवार को दिखाई दिया। तहसीलदार के पहुंचने से पूर्व ग्रामीण भी यहां विभिन्न समस्याओं को लेकर पहुंच गए थे। तहसीलदार दीपक शुक्ला बसई के सह कृषि विश्राम गृह कार्यालय में बैठे। ग्रामीणों ने उन्हें अपनी समस्याएं बताईं तो उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनने की बजाए उन्हें डांटकर भगा दिया। टेबल पर बैठकर नाश्ता करते नजर आए। बांकी समय अपने सह कर्मियों के साथ गपशप में निकाल दिया और शाम ढलने से पूर्व दतिया के लिए निकल गए।

बसई जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर है। ग्रामीण अपने सभी कामकाज छोड़ दतिया जाते हैं तो उन्हें दोनों तरफ से 140 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। साथ ही 200 रुपए किराया भाड़ा और खाने पीने में भी पैसा खर्च होता है। इसके बाद भी अगर काम नहीं होता है तो फिर से दतिया जाना पड़ता है। विभागीय अधिकारी ग्रामीणों की यह समस्या न देखते हुए उन्हें टरका देते हैं।

किसानों को नहीं मिला मुआवजा

बसई व आसपास के गांव सूखाग्रस्त घोषित हैं। इन गांव में अभी तक अधिकांश किसानों को सूखा राहत राशि नहीं मिली है। ज्यादातर किसान राहत राशि लेने के लिए तहसील कार्यालय में चक्कर लगाते हैं। ग्रामीण अपनी समस्या को लेकर जिला मुख्यालय पर भी जाते हैं लेकिन वहां भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। रति प|ी बालकिशन निवासी ठाकुरपुरा, रामेश्वर पुत्र ओमकार निवासी सतलौन का सर्वे सूची क्रमांक 226, सेव लाल पुत्र रगना अहिरवार निवासी हीरापुर सर्वे सूची क्रमांक 640, इनके पिता का नाम गलत डाल दिया गया। कई बार शिकायत कि पर डाट कर भगा दिया गया। वीरसिंह पुत्र देवसिंह परिहार निवासी मानिकपुर सर्वे सूची क्रमांक 3 एवं 31, कल्यान पुत्र देवसिंह परिहार निवासी मानिकपुर, विवेक शांडिल्य पुत्र अशोक के परिवार में सात लोगों के नाम जमीन है। सूची में भी नाम हैं। लेकिन किसी को भी राहत राशि नहीं मिली। महाराजपुरा सतलौन के निवासी रमेश केवट का नाम सूची में नहीं है।

कृषक विश्राम गृह में नाश्ता करते तहसीलदार व पास में खड़े ग्रामीण।

तहसीलदार ने भगा दिया
मेरा एक लड़का और लड़की है। मेरे पति की मौत के बाद परिवारों ने मेरी शादी देवर राकेश से कर दी थी। कुछ दिनों पूर्व दूसरे पति राकेश की भी मृत्यु हो गई। पति की जमीन का नामांतरण कराने के लिए तहसीलदार ने दतिया बुलाया था। वहां तहसीलदार ने कहा कि बसई आकर बात करेंगे। आज बसई में तहसीलदार ने तहसीलदार ने भगा दिया। गेंदारानी, निवासी बसई

यह कहना गलत है कि हम भगा देते हैं

गेंदारानी ने दो शादियां की थी। उसने हमें एक विवाह का प्रमाण पत्र दिया। दूसरे विवाह का प्रमाण पत्र नहीं दिया। अगर वह दोनों विवाह प्रमाण पत्र दे देती है तो नामांतरण हो जाएगा। सूखा राहत राशि की सूची में कुछ लोगों के नाम गलत हो गए हैं। नामों में संशोधित किया जा रहा है। यह कहना गलत है कि हम किसी की सुनते नहीं है और भगा देते हैं। दीपक शुक्ला, तहसीलदार दतिया

कोई शिकायत नहीं है

हमारे पास इस बात की कोई शिकायत नहीं आई है। फिर भी आपने अवगत कराया है तो मैं देखता हूं। जिसको दिक्कत हो उसका आवेदन मुझे मेल पर डलवा दें। मैं खुद देखूंगा। मदन कुमार, कलेक्टर, दतिया

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