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सवा लाख से अधिक आबादी के लिए सिर्फ एक डॉक्टर, नहीं मिलता इलाज

5 वर्ष पहले
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आए दिन अस्पताल में बनती है विवाद की स्थिति

भास्कर संवाददाता | इंदरगढ़

इंदरगढ़ नगर में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। नगर की 35 हजार और तहसील क्षेत्र के 117 गांव की सवा लाख अधिक आबादी के लिए इंदरगढ़ में महज एक डॉक्टर है। प्रतिदिन करीब मरीज ओपीडी में दर्ज होते हैं।

यह मरीज अस्पताल में समय रहते इलाज न मिलने के कारण परेशान होते हैं। मजबूरन उन्हें निजी क्लीनिक पर झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। आए दिन अस्पताल में मरीज और डॉक्टर के बीच विवाद की स्थिति बनती है। इसके बाद भी जिला मुख्यालय पर बैठे अधिकारी अस्पताल की व्यवस्था सुधारने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इंदरगढ़ अस्पताल में एक जननी एक्सप्रेस है। इस जननी एक्सप्रेस का संचालन पिछले दस दिन से बंद है। दूर दराज ग्रामीण क्षेत्र से प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को ट्रैक्टर, टैक्सी अथवा मोटर साइकिल पर बिठाकर लाना पड़ रहा है। बीएमओ डाॅ. सिंह ने इंदरगढ़ में जननी एक्सप्रेस बंद रहने की जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को भेजी है।

झोलाछाप डॉक्टरों पर उमड़ रही भीड़

मरीजों को समय पर इलाज न मिलने के कारण झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानों पर इलाज कराना पड़ रहा है। नगर के ह्रदय स्थल शीतला गंज, भांडेर रोड, सेंवढ़ा रोड, दतिया रोड, ग्वालियर रोड आदि जगहों पर स्थित प्राइवेट क्लीनिक पर मरीजों की भीड़ रहती है। इनमें अधिकांश वे मरीज होते हैं जो इंदरगढ़ अस्पताल में समय पर इलाज न मिलने के कारण इन दुकानों पर पहुंच रहे हैं।

अस्पताल में तैनात है पांच डॉक्टर
इंदरगढ़ अस्पताल में वर्तमान में बीएमओ सहित कुल पांच डॉक्टर पदस्थ हैं। जिनमें डा. अमरीश त्रिपाठी एक माह के अवकाश पर हैं। वहीं कुछ दिनों पूर्व ही इंदरगढ़ में पदस्थ हुए डा. वीरसिंह खरे ड्यूटी से अचानक गायब हो गए और बाद में उन्होंने अपना मेडिकल सर्टिफिकेट भिजवाकर मेडिकल लीव ले ली। अपना ट्रांसफार्मर कराने की जुगत में लगे डा. वीर सिंह खरे कब पुन: ड्यूटी ज्वाइन करेंगे, कहना मुश्किल है। ऐसे में बीएमओ डा. अशोक सिंह, डा. गोविंद सिंह और डा. एमएम शाक्य ही वर्तमान में अपने मुख्यालय पर हैं। क्लास वन डा. अशोक सिंह और डा. गोविंद सिंह के बीच बीएमओ पद को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। इसके अतिरिक्त अस्पताल में होने वाली एमएलसी, पीएम और न्यायालय में पेशियों के चलते समस्या और भी बढ़ जाती है। बीएमओ डा. सिंह कार्यालयीन कार्यों में व्यस्त रहते हैं। जिस कारण वर्तमान में महज एक डॉक्टर के भरोसे ओपीडी चल रही है।

मुझे जानबूझकर परेशान किया जा रहा है
मैं तो अपनी ड्यूटी बराबर करता हूं। कई बार मुझे अकेले ही ओपीडी संभालनी पड़ती है। मरीजों को देखना और संभालना मुश्किल होता है। बीएमओ ने व्यवस्था बदहाल कर रखी है न तो ओपीडी कक्ष में बिजली की समुचित व्यवस्था है और न ही भीड़ को संभालने हेतु किसी चतुर्थश्रेणी कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाती है। मैं एक क्लास-वन डॉक्टर हूं, लेकिन मुझसे दोयम दर्जे की ड्यूटी कराने के आदेश कर दिए जाते हैं जो मैं नहीं करूंगा। मुझे जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। डा. गोविंद सिंह, डॉक्टर

इंदरगढ़ अस्पताल की ओपीडी की लाइन में लगे मरीज।

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