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भगवान से जिस गाय को चराया, आज हम उस गाय को भूल गए: शास्त्री

5 वर्ष पहले
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दतिया| भगवान कृष्ण ने जिस गाय को चराया, आज हम उस गाय को भूल गए। गाय के अंदर सभी देवता वास करते हैं। फिर भी हम उसका ध्यान नहीं रखते। गाय की सेवा से परिवार को सभी प्रकार की सुख शांति मिलती है। इसका उदाहरण सिंधी समाज है। समाज गाय को बहुत मानता है। उसकी सेवा करता है। इसलिए समृद्ध है। यह बात पं. महेश चन्द्र शास्त्री ने कही। वह श्री बिहारी जी मंदिर के पीछे छोटी माता मंदिर पर चल रही देवी भागवत कथा में श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रहे थे। कथा का रसपान कराते हुए शास्त्री ने कहा कि जब तक धरती पर जीवन है, व्यक्ति मोह, माया से मुक्त नहीं हो सकता। पूतना का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मणी का भेष रखकर पूतना माता यशोदा के पास पहुंची। उसने माता यशोदा से कहा कि उसका दूध पीकर उनका पुत्र पराक्रमी होगा। यशोदा मोह में फंस गई। उन्होंने कृष्ण को पूतना के हवाले कर दिया। शास्त्री के कृष्ण की अन्य लीलाओं को सुना कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

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