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प्राथमिक स्कूल के बच्चे पढ़ने से पहले लगाते हंै झाड़ू

7 वर्ष पहले
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सरकारीस्कूल में प्राथमिक कक्षा के बच्चों को पढ़ने के लिए झाड़ू लगानी पढ़ती है। उसके बाद ही पढ़ाई शुरू होती है। स्कूल के दरवाजे खुलते ही शिक्षक बच्चों को झाड़ू थमा देते हैं। बच्चों का कहना है कि अगर झाड़ू नहीं लगाते हैं तो मास्टर नाराज होते हैं। वही शिक्षकों का कहना है कि सफाई कर्मी की व्यवस्था होने के कारण बच्चे झाड़ू लगाएं या फिर शिक्षक।

भले ही सरकारी स्कूलों में बच्चों से काम कराने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी हो। उसके बाद भी प्राथमिक स्कूल के शिक्षक बच्चों से झाड़ू लगवाने से बाज नहीं रहे है। सोमवार को जब भास्कर ने पड़ताल की तो शासकीय प्राथमिक बालक विद्यालय रेंडा में बच्चे झाड़ू लगा रहे थे। इस दौरान बच्चों का कहना था कि उन्हें रोजाना स्कूल में झाड़ू लगानी पड़ती है उसके बाद ही पढ़ाई शुरू होती है। अगर झाड़ू नहीं लगाते है तो शिक्षक नाराज होते है। जब इस संबंध में शिक्षकों से बात की गई तो उनका कहना था कि सफाई के लिए निधि नहीं आने के कारण उन्हें मजबूरन बच्चों से झाड़ू लगवाना पड़ती है।

झाड़ूके चक्कर में बंद किया स्कूल जाना: स्कूलमें झाड़ू लगाने के चक्कर में अधिकतर बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया। शासकीय प्राथमिक बालक विद्यालय रेंडा में बच्चों की संख्या 79 होने के बावजूद भी स्कूल में पढ़ने के लिए सिर्फ दस बच्चे ही आते हैं। यही स्थिति शासकीय कन्या विद्यालय की थी। यहां भी 80 बच्चें होने के बाद स्कूल में पंद्रह बच्चे ही बैठे हुए थे।

ग्राम रेड़ा के बालक प्राथमिक विद्यालय में झाडू लगाते छात्र

रोजाना स्कूल आते ही लगाते हैं झाड़ू

^रोजानास्कूल आते ही झाड़ू लगानी पड़ती है। उसके बाद ही मास्टर पढ़ाते है। अगर झाड़ू नहीं लगाते है तो मास्टर गुस्सा होते है। गौरवरजक, छात्रकक्षा चार

मास्टरकहते हैं इसलिए लगाते हैं

^स्कूलमें झाड़ू लगाने के लिए मास्टर कहते है। इसलिए झाड़ू लगाते हैं। रोहितकुशवाह, छात्रकक्षा पांच

सफाईकर्मी नहीं है

^इसबारे में मुझे जानकारी नहीं है। हो सकता है स्कूल में सफाईकर्मी की व्यवस्था होने के कारण स्कूल के बच्चे झाड़ू लगा रहे हो। रामकिशोरबिधौलिया, शालाप्रभारी शा.प्रा. बालकविद्यालय रेंड़ा

झाड़ूलगवाना गलत

^स्कूलोंमें बच्चों से झाड़ू लगवाना गलत है। यह समस्या वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखी थी। लेकिन बजट नहीं होने के कारण शिक्षकों को मजबूरन करवाना पड़ता