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परिवार फिर बसा, सरकारी कागजों से मिली मुक्ति, खुशियां लेकर लौटे

7 वर्ष पहले
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बेटी के लिए झगड़े थे, परिवार बनकर गए

दो पति लेने गए

86 साल के पिता को साथ ले गए बेटे

जिला एवं सत्र न्यायाधीश एन.वी. कौर कांद्रा ने बताया कि जिला कोर्ट के साथ ही महू, सांवेर, देपालपुर, हातोद में आयोजित लोक अदालत में कुल 1,15,465 प्रकरणों का निराकरण हुआ। इनमें प्रीलिटिगेशन के 55 हजार से अधिक प्रकरण तथा दुर्घटना क्लेम के 18 सौ प्रकरण भी शामिल हैं। इनमें 12 करोड़ 67 लाख रुपए के अवॉर्ड पारित हुए। नगर निगम, बिजली आदि के प्रकरण भी इनमें शामिल हैं। 13 नवंबर 2013 को हुई राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत 30 में एक लाख तीन सौ प्रकरणों में 101 करोड़ का लाभ पक्षकारों को मिला था।

जोशी के मुताबिक संतोष और अंजू बिना किसी विवाद के अलग-अलग रह रहे थे। दोनों की छह साल की बेटी रिदिमा भी है। पिता ने बेटी को साथ रखने के लिए आवेदन कोर्ट में लगाया था। शनिवार को मां के साथ बेटी आई। पहले तो बेटी अपने पिता को मां के आंचल में से छिप-छिपकर देखती रही। माता-पिता भी एक दूसरे से नजरें नहीं मिला रहे थे, लेकिन एक टेबल पर बैठाकर घंटेभर काउंसिलिंग हुई तो सालों का विवाद निपट गया। बेटी को लेने आए थे, परिवार बनकर कोर्ट से घर गए।

एडवोकेट अचला जोशी के मुताबिक 86 साल से हाजी गनी पटेल के चार बेटे अब्दुल, मोहम्मद, गनी एक अन्य हैं। चारों में से कोई बेटा मां-बाप को साथ रखने को तैयार नहीं था। इस पर हाजी गनी मोहम्मद ने परिवार न्यायालय में बेटों से भरण-पोषण भत्ता दिलाने के लिए आवेदन लगाया था। इस मामले को लोक अदालत में रखा गया था। चारों बेटों को पिता के साथ बैठाकर काउंसिलिंग की गई तो मामला रजामंदी से निपट गया। चारों बेटे मां-बाप को रखने के लिए राजी हो गए। बेटे बारी-बारी से पिता के गले लगे। इसके बाद घर के लिए रवाना हो गए।

प्रजापत नगर निवासी गायत्री को अपने साथ ले जाने के लिए दो पति कुटुम्ब न्यायालय पहुंच गए। महिला ने पहले एन. प्रसाद को तलाक देने के लिए दो साल पहले आवेदन किया था। तलाक होने से पहले ही महिला के पिता ने उसकी शादी नोटरी करवाकर एक अन्य व्यक्ति से कर दी। कुछ महीने साथ रहने के बाद महिला ने पहले पति से तलाक के लिए दिया आवेदन वापस ले लिया। वह कुटुम्ब न्यायालय आई तो दूसरा पति भी वहां पहुंच गया। कोर्ट परिसर में ही प|ी के लिए दोनों पति झगड़ लिए। दूसरे पति की धुनाई भी कर दी। बाद में महिला ने ही न्यायालय की प्र