पांच माह में 55 जानवरों की मौत, नहीं होता नियमित चेकअप
कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में व्हाइट टाइगर के कुनबे की आखिरी सदस्य शिवानी की मौत के बाद प्रबंधन पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यह पहला मौका नहीं है जब जू में इस तरह के हालात बने हों। इससे पहले भी जानवरों की मौत होती रही है। कभी कोबरा सांप के काटने से व्हाइट टाइगर की मौत तो कभी अन्य कारणों से टाइगर-तेंदुओं की मौत। सवाल यह है कि निगम इसे कितनी गंभीरता से ले रहा है। हालत यह है कि एक अफसर को ही सारे काम करना पड़ रहे हैं।
उद्यान, सिक्युरिटी, इंजीनियरिंग और वेटरनरी जैसे सेक्शन में कोई जिम्मेदार अफसर तैनात नहीं है, जबकि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण का नियम है कि हर विभाग में एक जिम्मेदार अफसर होना चाहिए। इधर, जू प्रबंधन ने तय किया है कि हर छह माह में हर जानवर की स्वास्थ्य जांच होगी। ब्लड सैंपल तीन-तीन लैब में भेजा जाएगा। फिर तीनों रिपोर्ट देखने के बाद विशेषज्ञ बताएंगे कि इलाज कैसे शुरू किया जाए।
जानवरों की बीमारी पता करने के लिए कोई प्लानिंग नहीं।
जानवरों के नियमित चेकअप को लेकर कोई योजना नहीं।
पांच साल में 55 जानवरों की मौत हो चुकी है। ज्यादातर लापरवाही के कारण हुई।
सुरक्षा को लेकर कोई सख्ती नहीं। कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं।
50 फीसदी मौतें औसत उम्र से पहले
जू में पिछले पांच साल में 55 से ज्यादा जानवरों की मौतें हुई हैं। इनमें ज्यादातर बीमारी या लापरवाही के कारण हुई हैं। वह भी जानवरों की औसत उम्र पूरी होने से पहले। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगम इतने समय से लापरवाही क्यों बरत रहा है। क्यों हर काम की जिम्मेदारी तय नहीं की जा रही है।
ये हैं हाल
कर रहे हैं बड़े बदलाव
जू में व्यवस्था सुधार को लेकर तेजी से बदलाव हो रहे हैं। उद्यान के लिए सुपरवाइजर की नियुक्ति हुई है। जानवरों के रूटीन चेकअप को लेकर भी प्लानिंग कर रहे हैं। ब्लड सैंपल वेटरनरी हॉस्पिटल के साथ ही अन्य दो लैब में भी भेजेंगे। -डॉ. उत्तम यादव, प्रभारी, इंदौर जू