सरकार बताए विधानसभा में क्यों पेश हो झा आयोग की रिपोर्ट : हाईकोर्ट
पूरे आठ साल बाद सरदार सरोवर बांध विस्थापितों के पुनर्वास और फर्जी रजिस्ट्री के मामले के लिए गठित जस्टिस एसएस झा आयोग की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश हुई, लेकिन उसकी सील नहीं खुली। दरअसल, राज्य सरकार ने एक आवेदन पेश कर कहा कि आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाए। इसके लिए सरकार ने कमीशन और इंक्वायरी एक्ट 1956 की धारा 4 में निहित प्रावधान का हवाला भी दिया। राज्य सरकार के साथ-साथ नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी ने भी आवेदन पेश कर रिपोर्ट को विधानसभा के समक्ष रखने की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और जस्टिस संजय यादव की खंडपीठ ने इस मामले पर राज्य सरकार और नर्मदा बचाओ आंदोलन को अपना-अपना जवाब पेश करने कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।
हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2008 को फर्जी रजिस्ट्री और पुनर्वास में हुए घोटाले की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। उसके बाद हर साल आयोग का कार्यकाल बढ़ा और आयोग जांच और रिपोर्ट पेश करने के लिए मोहलत लेता रहा। नर्मदा बचाओ आंदोलन ने आरोप लगाया था कि करीब दो हजार लोगों की फर्जी रजिस्ट्री की गई है। इसके अलावा विस्थापितों के पुनर्वास में बहुत-सी गड़बड़ियां की गई हैं, जिस कारण बहुत से पात्रों को उनका हक नहीं मिला है।
आंदोलन की सूत्रधार मेधा पाटकर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट से एक बड़ा घोटाला सामने आएगा और बहुत से शासकीय अधिकारी इसकी गिरफ्त में आएंगे। उन्होंने कहा कि दरअसल सरकार नहीं चाहती कि रिपोर्ट सार्वजनिक हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। पाटकर ने कहा कि चूंकि आयोग का गठन हाईकोर्ट ने किया है और उसके बाद उसके काम पर लगातार निगरानी रखी है तो रिपोर्ट भी हाईकोर्ट में खुलनी चाहिए।
बांध प्रभावित किसानों के आवेदनों का करो निराकरण : हाईकोर्ट ने ओंकारेश्वर और इंदिरा सागर बांध की नहरों से होने वाले लीकेज से प्रभावित किसानों के आवेदनों का जल्द निराकरण करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और जस्टिस संजय यादव की खंडपीठ ने कृषि और एनवीडीए के अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच जल्द पूरी करने कहा। इस मामले में पूर्व में हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस टीके कौशल को जांच सौंपी थी, जो 11 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट देंगे। नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर ने बताया कि उक्त विभागों के अधिकारियों ने अभी तक जांच पूरी नहीं की है, जो कि जस्टिस कौशल की रिपोर्ट आने के पहले होना जरूरी है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उक्त अधिकारियों ने केवल 15 किसानों के दावे मंजूर किए और सैकड़ों किसानों के नामंजूर कर दिए, जबकि इन मामलों में तहसीलदार का पंचनामा हो चुका है।
सरदार सरोवर बांध विस्थापितों के फर्जी रजिस्ट्री मामला