पुलिस को गुमराह करने के लिए दिल्ली से ग्वालियर आकर कॉल करते थे आरोपी
ग्वालियर | डीपीए स्कूल के छात्र रामेंद्र गुर्जर अपहरण कांड के 2 आरोपियों सतीश गुर्जर व बादल दुबे को गिरफ्तार करने के साथ ही इनसे फिरौती के रूप में लिए गए 16.20 लाख रुपए भी पुलिस ने बरामद कर लिए हैं। रामेंद्र को लेकर एक आरोपी नोएडा में रहता था, दूसरा आरोपी पुलिस को गुमराह करने के लिए ग्वालियर, मथुरा आकर फिरौती का कॉल करता और नोएडा चला जाता था।
फिरौती मांगने वाला आवाज और भाषा भी बदलता था, ताकि पुलिस उनकी पहचान न कर पाए, लेकिन अपहरण से पहले छोड़े गए एक क्लू के सहारे पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।
एसपी हरिनारायणचारी मिश्रा ने बताया कि रामेंद्र गुर्जर अपहरणकांड को पुलिस ने पूरी गंभीरता से लिया था और जैसे ही अपहरण की सूचना पुलिस तक पहुंची घेराबंदी भी शुरू कर दी थी, लेकिन तब तक अपहरणकर्ता दूर निकल गए थे। इसके बाद बच्चे की जान बचाना प्राथमिकता थी, इसलिए घेराबंदी आक्रामक तरीके से की और इसका ही परिणाम है कि अब अपहरणकर्ता सहित फिरौती की ज्यादातर रकम भी बरामद हो गई है।
रामेंद्र को नोएडा में रखा, फिरौती के काॅल ग्वालियर और मथुरा से किए : पूछताछ के दौरान अपहरणकर्ताओं ने बताया कि वह जानते थे कि पुलिस मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर उन तक पहुंच सकती है, इसलिए उन्होंने नोएडा में बच्चे को रखा और इसके बाद फिरौती के लिए 3 कॉल ग्वालियर और 1 कॉल मथुरा से किया था। मथुरा में ही उन्होंने रामेंद्र से घरवालों की बात करवाई थी। फिरौती मांगते समय भी दोनों आरोपियों ने दिल्ली और हरियाणा जैसी बोली बोलते थे और आवाज भी बदल लेते थे। अपहरणकर्ता अपनी योजना में सफल भी रहे। पुलिस उनके बिछाए जाल में उलझी भी रही, लेकिन अपहरण करने से पहले एलआईसी एजेंट के यहां पर छोड़े गए क्लू ने अपहरणकर्ताओं को पकड़वा दिया। अपहरणकर्ता सतीश ने एलआईसी एजेंट के यहां पर अपना नाम तो फर्जी बताया था, लेकिन पिता का नाम असली बता दिया। इसके बाद कुछ और क्लू मिले, जिन्होंने पुलिस को दोनों अपहरणकर्ताओं तक पहुंचा दिया।
एक महीने से बना रहे थे योजना, नोएडा में लिया था कमरा, डमी एक्सरसाइज भी की : आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह 1 महीने से अपहरण की योजना बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने नोएडा के न्यू अशोक नगर के ए ब्लॉक में कमरा किराए पर लिया था। यहां पर उन्हें कोई जानता नहीं था। इस दौरान यह दोनों कई बार ग्वालियर आए और डीडी नगर में सिम विक्रेता गौरव शर्मा की दुकान से 23 जनवरी को फर्जी आईडी से 3 सिमकार्ड खरीदे थे। सतीश वारदात से 15 दिन पहले अपने ताऊ मजबूत सिंह के घर पहुंचा था और रामेंद्र की बड़ी बहन से घरवालों के फोन नंबर भी लिए थे ताकि फिरौती का कॉल किया जा सके। आरोपी दिल्ली में कीर्ति मोशन पिक्चर्स की फिल्मों में काम करते थे । यहां पर सतीश ने बताया था कि उसके बहनोई का एक्सीडेंट हो गया है, इसलिए नहीं आ पाएगा वहीं बादल ने कहा था कि उसे मलेरिया हुआ है।
हीरो बनने के लिए प्रोड्यूसर से करना थी पार्टनरशिप इसलिए चाहिए था रुपया : सतीश और बादल को फिल्मों में हीरो बनना था, इसके लिए उन्हें बताया गया था कि फिल्म निर्माण में प्रोड्यूसर के साथ रुपया भी लगाना होगा तभी हीरो का रोल मिल पाएगा। इसके बाद इन दोनों ने अपहरण करने की योजना बना ली थी।
पहले घेराबंदी की कहानी सुनाई थी अब फिरौती की रकम दिखाई : रामेंद्र के मुक्त होने के बाद पुलिस ने पलवल की फैक्टरी में घेराबंदी कर उसे मुक्त कराने की कहानी सुनाई थी। अपहरणकर्ताओं के गिरफ्तार होने के बाद पुलिस ने अपनी कहानी बदली और फिरौती की बात स्वीकार करने के साथ ही 16.20 लाख रुपए भी बरामद करने की बात बताई।
रामेंद्र अपहरण मामला