बैंक ऑफिसर्स का हो सालाना टेस्ट: RBI
रिजर्वबैंक ऑफ इंडिया की एक कमिटी ने अपनी सिफारिश में बैंकिंग इंडस्ट्री में कर्मचारियों की कमी दूर करने के उपाय बताए हैं। कमिटी ने ऑफिसर्स के लिए सालाना टेस्ट कराने का सुझाव दिया है, जिससे पता चल सकेगा कि वे ट्रेनिंग में कितना सीख पाते हैं।
कमिटी की सिफारिशों में सरकारी बैंकों में लैटरल हायरिंग करने और बिना सोचे समझे ट्रांसफर पर रोक लगाने की बात कही गई है। कमिटी ने अपनी सिफारिश में कहा है कि इंडस्ट्री की बढ़ती जरूरतें पूरी करने के लिए नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट जैसे इंस्टीट्यूशंस की हालत में सुधार लाने, मैनेजिंग डायरेक्टर्स और चीफ एग्जेक्यूटिव्स की मेंटरिंग और जल्दबाजी में होने वाले इंडक्शन की जगह सख्त प्रोग्राम बनाना जरूरी है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के एग्जेक्यूटिव डायरेक्टर जी. गोपालकृष्ण की अगुवाई वाली कमिटी ने कहा, \\\'ह्यूमन रिसोर्स की स्ट्रॉन्ग इनवेंटरी तैयार करने और बैंक जॉइन करने वाले हर इंडिविजुअल के लिए करियर बिल्डिंग प्लान बनाए जाने की जरूरत है। रिक्रूटमेंट छिटपुट या एक बार में नहीं होना चाहिए। यह नियमित अंतराल पर होना चाहिए। इससे बैंकों की कारोबारी जरूरत के हिसाब से मैनपावर में ग्रोथ पक्की की जाएगी।\\\'
पिछले कुछ साल से बैंकिंग इंडस्ट्री सालाना 40000 लाख एम्पलॉयी हायर कर रही है। लेकिन इसको बड़ी संख्या में एक्सपीरियंस्ड एम्पॅलायी के रिटायरमेंट और एंट्री लेवल पर स्किल की कमी की एक साथ दो दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। एम्पलॉयी कॉस्ट घटाने के मकसद से सरकारी बैंकों में पिछले दशक में रिक्रूटमेंट नहीं किए जाने से मिडिल लेवल पर टैलेंट बहुत कम मिल रहा है। साथ ही प्राइवेट बैंक टैलेंट्स के लिए सरकारी बैंकों का रुख करते रहे हैं। कमिटी ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि बैंक एम्पलॉयी बनने के लिए एंट्री लेवल पर नैशनल और ऑनलाइन बैंकिंग एप्टीट्यूड टेस्ट जरूरी तो है, लेकिन पर्याप्त शर्त नहीं है।