मंत्रीजी को दामादों की चिंता
मंत्रीजी को दामादों की चिंता
धार की भोजशाला में पूजा और नमाज को लेकर पूरी सरकार गंभीर थी। एक वरिष्ठ मंत्री कुछ ज्यादा ही गंभीर थे। वजह है कि उनके दामाद धार के कलेक्टर हैं। सरकार ने पूरी प्रशासनिक ताकत झोंक कर किसी अनहोनी को टाल दिया, लेकिन मंत्रीजी की चिंता अभी खत्म नहीं हुई। अभी सिंहस्थ की चुनौती बाकी है। दरअसल इन्हीं मंत्री के दूसरे दामाद वहां पदस्थ हैं। मुख्यमंत्री उज्जैन में बनने वाले पांच मंजिला अस्पताल को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं, इसलिए चिंता कुछ ज्यादा है। मंत्री जी दामाद को सतर्कता और होशियारी से काम करने के टिप्स दे रहे हैं।
नो गिफ्ट, नो बुके, ओनली ब्लैसिंग्स
मुख्यमंत्री सचिवालय के दो बड़े अफसरों के यहां हुए विवाह समारोह और विधानसभा के प्रमुख सचिव भगवानदेव इसरानी के बेटे की शादी की चर्चाएं अभी भी गर्म हैं। इसरानी इसलिए कि उन्होंने निमंत्रण पत्र में ही छपवा दिया था कि ‘नो गिफ्ट-नो बुके’। इसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय के दो अफसरों के यहां विवाह समारोह हुए। इसकी काना-फूसी इसलिए हो रही है क्योंकि दोनों ही एक पद पर हैं। दोनों पॉवरफुल हैं। अब नौकरशाही यह अनुमान लगा रही है कि किसके कार्यक्रम में ज्यादा कद्दावर मेहमानों ने शिरकत की।
अफसर की सलाह, मंत्री नि:शब्द
वन विभाग का प्रोग्राम सफल होने पर वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार की खुशी देखते ही बनती थी। इतनी कि भोपाल में मौजूद सभी आईएफएस अफसरों को धन्यवाद देने के लिए गेट-टू-गेदर किया। यहां सभी अपने अनुभव भी शेयर कर रहे थे। तभी सीसीएफ स्तर के एक अफसर ने कहा-‘सर कांग्रेस के शासन के समय भी कई बड़ी घोषणाएं कर दी थीं, जो बाद में पूरी नहीं हो पाईं। लोगों ने उसे याद रखा। हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए।’ जब इस अफसर के दिल की बात जुबां पर आई तो शेजवार - अपर मुख्य सचिव दीपक खांडेकर ने एक-दूसरे से नजरें मिलाई, लेकिन दोनों रहे नि:शब्द।
दिल्ली का टिकट या लाल बत्ती
इंदौर में भाजपा की राजनीति में इस सुगबुगाहट से हलचल है कि भाजपा के ताकतवर प्रदेश संगठन महामंत्री रहे कृष्ण मुरारी मोघे का जल्द ही पुनर्वास हो सकता है। इंदौर नगर निगम के महापौर पद से विदा होने के बाद से मोघे के पास कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं है। खबर है कि उन्हें जल्द ही राज्यसभा भेजकर या हाउसिंग बोर्ड का चेयरमैन बनाकर लाल बत्ती से नवाजा जाएगा। मोघे का महापौर कार्यकाल पूरा होने के बाद इंदौर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने विधायक मालिनी गौड़ को महापौर उम्मीदवार बनाया था, वे चुनाव जीत भी गईं। जब महापौर पद के लिए मालिनी का नाम तय किया जा रहा था तब मोघे चाहते थे कि मालिनी की जगह उन्हें (मोघे को) चुनाव लड़ाया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब दो साल बाद अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मोघे के पुनर्वास के संकेत दिए हैं। देखना यह है कि मोघे को लाल बत्ती वाली गाड़ी मिलती है या दिल्ली का टिकट।
...ताकि घर की बात घर में रहे
घर की बात घर में ही रहे तो अच्छा है। बाहर गई तो लोग क्या कहेंगे। और घर चार इमली में हो तो फिर तो ज्यादा सोचना पड़ता है। यही सोचकर एक आईएएस अफसर ने अपनी गाड़ी और ड्राइवर को घर से दूर रहने को कह दिया। इतनी दूर जहां तक मैडम की आवाज नहीं पहुंचे। दरअसल मैडम की आवाज जितनी तेज है, साहब की उतनी ही धीमी। वे जब बोलती हैं तो सड़क तक आवाज सुनाई देती है। साहब, मैडम को धीरे बोलने से तो रोक नहीं सकते। घर में काम करने वाले तो विश्वासपात्र हैं। लेकिन दिक्कत ड्राइवर से है। तब साहब ने एक तरीका सोचा। उन्होंने ड्राइवर को इतनी दूर गाड़ी खड़ी करने के निर्देश दे दिए कि जहां तक मैडम की आवाज न पहुंच सके। अब घर की बात घर में ही रहेगी या नहीं? इतना जरूर हुआ कि आईएएस अफसरों के ड्राइवरों में चर्चा हो रही है कि एक साहब अपनी गाड़ी घर से दूर क्यों रखते हैं। बता दें कि साहब मंत्रालय में पदस्थ हैं जबकि मैडम जमीनों से जुड़े एक महकमें की मुखिया हैं।
मुझे हटवा दीजिए ना
प्रमुख सचिव स्तर के एक अधिकारी इसी साल दिसंबर में रिटायर होने वाले हैं। वर्तमान में उनके पास दो विभागों की कमान हैं, लेकिन उन्हें दोनों सूखे खेत की तरह लगते है। दोनों विभागों में कर्मचारियों से संबंधित फाइलों के अलावा ज्यादा कुछ काम नहीं है। फिर रोजाना कोई न कोई कोर्ट केस। साहब अपनी परेशानी हर उस व्यक्ति से शेयर कर रहे हैं, जो सीएम सचिवालय में एप्रोच रखता है। वे चाहते हैं कि उन्हें जिस विभाग का एडिशनल चार्ज मिला है, वह वापस हो जाए। उन्होंने एक कर्मचारी नेता से कहा कि कुछ भी करो, मुझे यहां से हटवा दीजिए। बता दें कि ये वही अफसर हैं जो मंत्रालय की वर्किंग पांच दिन किए जाने की फाइल आगे बढ़ाने की बजाय वापस करने में भरोसा रखते हैं।
महामंत्री की दौड़
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान को अपनी नई टीम बनाना है। इस समय जितने महामंत्री हैं, उनमें से एक का हटना तय माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से भोपाल में सक्रिय एक नेता खुद को महामंत्री पद का प्रबल दावेदार बता रहे हैं। छह लोग और कतार में हैं। ये नेताजी मैहर चुनाव में भी अपनी सेवाएं देकर आ चुके हैं। देखना यह है कि पार्टी में उनकी कुछ महीनों की सेवाओं का ईनाम महामंत्री के रूप में मिलता है या नहीं।
जब अफसर बोले ‘आई एम टैक्स पेयी’
सिंहस्थ में हो रहे कामों को लेकर एक अफसर ने जनता के पैसों के सदुपयोग का सिद्धांत याद दिला दिया। एक बैठक में अपर मुख्य सचिव स्तर के एक अफसर ने कह दिया पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा यह बात मैं अफसर नहीं, एक करदाता के नाते कह रहा हूं। उनके इतना कहते ही सब उन्हें देखने लगे। उन्होंने तुरंत अपना आशय समझाते हुए कहा ‘उज्जैन के एक घाट पर लाल पत्थर लगाए गए तो कहा जाने लगा कि ऐसे ही पत्थर दूसरे घाट पर लगने चाहिए। मंदसौर से उज्जैन की सड़क बने तो ठीक लेकिन मंदसौर शहर के भीतर की सड़कें बन रही हैं।’ एक और अधिकारी ने इस सहमति दिखाई और एक प्रस्ताव पर आपत्ति जताई, जिसे मुख्य सचिव ने मान लिया। इन वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया सिंहस्थ के नाम पर जो ताबड़-तोड़ खर्च हो रहा है उस पर लगाम लगनी चाहिए।