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‘मनोविकार व नकारात्मक चिंतन से अशांति आती है’

5 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | आलीराजपुर

आज व्यक्ति परमात्मा की पूजा, स्तुति तो कर रहा है लेकिन उससे दिल का संबंध स्थापित नहीं कर रहा। देहधारियों के साथ रात-दिन संपर्क रखने से परमात्मा से प्राप्त होने वाली शक्ति से दिन प्रतिदिन दूर होता जा रहा है। मानव आत्मा का मनोबल तेजी से गिरता जा रहा है। यह बात ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने कही। वे स्थानीय आदिवासी बालक छात्रावास में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा व्यक्ति के जीवन में मनोविकार, नकारात्मक चिंतन प्रवेश करता जा रहा है। जिसके कारण दु:ख, अशांति, तनाव, अकेलापन महसूस कर रहा है।

नारायण भाई ने कहा ईश्वर से शक्ति लेने के लिए आंतरिक मन की स्थिति शांत होनी चाहिए, लेकिन छोटी-छोटी बातों से अपने को अशांत करना, समस्या से अपने को परेशान कर देने से हम ईश्वर से शक्ति ग्रहण नहीं कर पाते हैं। हम अपने चित को शांत करने के लिए सदा अटेंशन रहे कि इस सृष्टि में जो भी हो रहा है वह अच्छा हो रहा है। जितने अच्छे विचार करेंगे उसका फल भी अनुभूति के रूप में अच्छा ही मिलेगा। धैर्य, शांति, शक्ति के रूप में प्राप्ति होने लगेगी।

अंतर्मन में जबर्दस्त शक्तियों का सागर
नारायण भाई ने बताया हमारे अंतर्मन में जबर्दस्त शक्तियों का सागर लहराता है। उन शक्तियों की अनुभूति के लिए हमें अपने बाह्य मन को शांत करने की आवश्यकता है। बातें बड़ी नहीं होती है लेकिन हम सोच-सोच के उसे बड़ी बना देते हैं। सदा यह सोचो बातों से बड़ी मेरी शांति है। मैं कभी भी अपने मन को छोटी-छोटी बातों से अशांत व परेशान नहीं होने दूंगा। इससे जीवन में आंतरिक निखार आने लगेगा। इस अवसर पर छात्रावास इंचार्ज राजेंद्र कुमार, ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन सहित विद्यार्थी मौजूद थे।

बालक छात्रावास में संबोधित करते ब्रह्माकुमार नारायणभाई व कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थी।

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