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9 लाख शिक्षक कम, 8 लाख अप्रशिक्षित, कैसे होगी लर्निंग

6 वर्ष पहले
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न्यूज़

तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले केवल 25 फीसदी छात्र ही दूसरी कक्षा के पाठ सही-सही पढ़ सकते हैं। आठवीं कक्षा के भी 25 फीसदी छात्र दूसरी की किताबें फर्राटे से पढ़ सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा की यही हालत है। 6-14 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य प्राइमरी एजुकेशन का लक्ष्य करीब है। इस उम्र के 96.7 फीसदी बच्चे स्कूलों की रजिस्टर में हैं, लेकिन बीते छह साल से इस आंकड़े में खास बदलाव नहीं हुआ। लर्निंग के स्तर में तो और गिरावट आई है। प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी इसका सबसे बड़ा कारण है। तकनीक के इस्तेमाल से इस समस्या का असर कम हो सकता है, लेकिन बेहतर लर्निंग के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था जरूरी है।



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स्कूल नहीं जाते बच्चे: प्राइमरीस्कूलों में 71.4 और अपर प्राइमरी स्कूलों में 71.1 फीसदी छात्र ही स्कूल जाते हैं। वर्ष 2013 के मुकाबले प्राइमरी स्कूल में अटेंडेंस बढ़ा है जबकि अपर प्राइमरी स्तर पर थोड़ा कम हुआ है।

पुराने लर्निंग टूल्स: स्कूलोंमें बच्चों को सिखाने के लिए अब भी पारंपरिक तरीके इस्तेमाल होते हैं। इंटरेक्टिव, पिक्टोरियल या तकनीक पर आधारित नए तरीकों के बारे में शिक्षक भी नहीं जानते।

9 लाख शिक्षक कम: देशके करीब 14 लाख स्कूलों में नौ लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं। प्राइमरी स्कूलों में 5.86 लाख और अपर प्राइमरी स्कूलों 3.5 लाख शिक्षक कम हैं।

स्कूल एजुकेशन

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