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कलेक्टर ने कहा-नरवाई जलाए किसान

7 वर्ष पहले
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जिलापंचायत कार्यालय के वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम में शुक्रवार को ई-कृषि पाठशाला लगाई गई। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके बड़ाया तथा डॉ. जीएस गाठिए ने किसानों को फसलों के संबंध में समसामयिक सलाह दी। किसानों की फसलों, रोगों, कीटों, खाद, उन्नत किस्मों, बीजों, आधुनिक उपकरणों के संबंध में भी जानकारी दी। रूम में उपस्थित किसानों ने खेती किसानी से संबंधित अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं के संबंध में कृषि वैज्ञानिकों से सवाल पूछे। समाधान सुने। कृषि वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, मिट्टी परीक्षण, लहसून की फसल में सूखने की समस्या, मिर्ची की फसल में चुर्रा-मुर्रा रोग, गेहूं फसल की कटाई, नरवाई जलाने की सलाह, जिला स्तर पर जैविक उत्पाद के पंजीयन के संबंध में व्यवस्थाएं आदि के संबंध में विशेष जानकारी दी गई। कलेक्टर जयश्री कियावत ने उपस्थित किसानों से आग्रह किया है कि वे वैज्ञानिकों के बताए अनुसार गर्मियों में अपने खेतों की गहरी जुताई करे। मिट्टी परीक्षण कराकर मृदा स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त करें तथा अनुशंसा अनुसार खाद एवं उवर्रकों का प्रयोग करे। गेहूं की कटाई के बाद नरवाई जलाने तथा जैविक विधि से खेती करने की किसानों से अपील की। उप संचालक कृषि आर.पी. कनेरिया ने आग्रह किया कि वे ग्रीष्मकाल में जिन किसानों के पास पानी है, वे जायद की फसल के रूप में मूंग, तिल एवं ग्रीष्मकालीन मक्का आवश्यक रूप से लें। उद्यानिकी फसलों के संबंध में किसानों को तकनीकी सलाह दी गई। किसानों ने ड्रीप, स्प्रेकंलर के साथ ही विद्युत/डीजल पम्प के लक्ष्य बढ़ाने की मांग की। पॉलीहाउस, नेट हाउस के संबंध में भी अवगत कराया गया। परियोजना संचालक आत्मा नगीन रावत ने बताया भारत सरकार की मिट्टी परीक्षण योजना के तहत विकासखण्ड स्तर पर भी मिट्टी परीक्षण प्रयोग शालाएं स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा इसके लिए प्रत्येक विकासखंड में 4-4 हजार वर्गफीट जमीन तलाशने के लिए कहा गया है। जिपं सीईओ श्रीकांत बनोठ भी मौजूद थे।

धार. कृषि वैज्ञानिकों ने जैविक खेती पर ऑन लाइन जानकारी दी।

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