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बगैर पेटी के कचरा-कचरा हो रहा शहर

7 वर्ष पहले
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जागरुक भी कहां फेंके कचरा| स्वच्छता का सपना सिर्फ झाड़ू से कैसे होगा साकार, शहर में सबसे बड़ी समस्या कचरा पेटी नहीं होना

स्वच्छताअभियानमें सिर्फ झाड़ू लगाई जा रही है लेकिन कचरा फैलने की सबसे बड़ी वजह को अब तक प्रशासन ने अनछुआ कर रहा है। बात हो रही है कचरा पेटी की। शहर में सबसे बड़ी समस्या ही कचरा पेटी नहीं होना है। बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाली दुकानों के बाहर कचरा पेटियां लगाने को लेकर कोई जागरूकता पहल अब तक नहीं की गई है। ही चौराहे, हॉकर्स जोन में दुकान लगाने वाले, गुमटी-ठेलों के बाहर कचरा पेटियां रखवाई गई हैं। इसी के अभाव में सबसे ज्यादा कचरा होने की बात सामने आई है।

भास्कर ने दुकानें बंद होने के समय देर शाम को शहर के प्रमुख स्थानों के हालात देखे तो हर कहीं कचरा पेटी नहीं होने का ही कारण सामने आया। घोड़ा चौपाटी पर टोकरियों में सीताफल बेचने आए लोगों ने पत्तों, बीज आदि का कचरा मुख्य चौराहे पर फेंक दिया। यहीं पर दूसरे हिस्से में हॉकर्स जोन है, जहां व्यंजनों के कई ठेले लगे हैं। कागज की पुड़िया, डिस्पोजल, प्लेट, दोना आदि में खाद्य सामग्री देने वाले ठेले चालकों में से किसी ने डस्टबिन नहीं रखा है। लोग सडक़ों पर कचरा फेंकते रहे। पाटीदार तिराहे पर भी यही हाल था। फल, चाट, नमकीन के ठेलों के आगे कचरा ही कचरा था। खेड़ापति मार्ग पर पुराने सीएसपी कार्यालय के समीप होटल के पास पानी के पाउच, डिस्पोजल का ढेर लगा था। भीतर टेबल पर बैठे लोगों द्वारा यह कचरा दिया जा रहा था, जो कर्मचारी बार-बार बाहर लगाकर सड़क किनारे ढेर लगा रहे थे। बस स्टैंड पर पुलिस चौकी के पास एक दुकान वाले ने दिनभर का कचरा इकट्ठा कर सामने फेंक दिया। पूरे बस स्टैंड पर केले, सीताफल आदि के ठेले लगते हैं, जिसके बाहर छिलके पसरे थे।

बस स्टैंड पर पुिलस चौकी के सामने दुकानों का कचरा इस तरह निकालकर फेंका गया था।

कचरा फेंकने का विकल्प नहीं

अभियानसे जुड़कर सफाई की शपथ लेने के बाद लोगों में जागरूकता और जज्बा बढ़ा है। ऐसे लोगों को भी कचरा पेटी के अभाव में चाहते हुए भी सड़क पर कचरा फेंकना पड़ता है। हालांकि कुछ दुकानदारों ने स्वेच्छा से कचरा पेटी बाहर रखी भी है लेकिन इनका प्रतिशत बेहद कम है।

जिम्मेदारबोले

^कचरापेटी के अभाव की स्थिति हमने भी देखी है। इसे लेकर मेडिकल एसोसिएशन, वैश्य महासम्मेलन समेत कुछ संगठन