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भारतीय अर्थव्यवस्था में मिल रहे सुधार के संकेत : एडीबी
नई दिल्ली|एशियाई विकासबैंक (एडीबी) का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में देश की विकास दर 5.5 फीसदी और अगले साल 6.3 फीसदी रह सकती है। एडीबी ने अगले साल के लिए पहले 6 फीसदी विकास का अनुमान जताया था। एडीबी की ओर से जारी आउटलुक 2014 में कहा गया है कि गत मई में आम चुनाव के बाद केंद्र में स्थिर सरकार बनी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार जरूरी आर्थिक सुधारों पर अमल के लिए पिछली यूपीए सरकार की तुलना में ज्यादा बेहतर स्थिति में है। वह उचित कदम उठाकर देश में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार तेज कर सकती है। एनडीए सरकार ने कई सुधारों की जरूरत को रेखांकित किया है। वह उन ढांचागत समस्याओं से धीरे-धीरे निपटेगी जिनसे विकास दर बीते दो साल में धीमी हुई है और निवेश में ठहराव आया है। सरकार द्वारा मजबूत आर्थिक नीति लाने को लेकर लोगों में भारी उम्मीदें हैं। इसके चलते शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई को छू गए हैं।
स्थिर,पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी नीति की जरूरत : उद्योग
नई दिल्ली| प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया अभियान का उद्योग जगत ने स्वागत किया है। जाने-माने उद्योगपतियों ने सरकार से नीतियों में बदलाव करने, कारोबार की बाधाएं दूर करने और स्थायी कर नीति लागू करने की मांग की। टाटा संस के चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने कहा कि देश में स्थिर, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी नीति होनी चाहिए। श्री मिस्त्री ने कहा कि भारत में युवाओं की आबादी सबसे ज्यादा है। देश में प्रति वर्ष 1.2 करोड लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी अभी मात्र 15 प्रतिशत है जबकि विकसित देशों में यह 25 प्रतिशत से अधिक है। आईसीआईसीआई बैंक की अध्यक्ष चंदा कोचर ने बेहतर गुणवत्ता लेकिन सस्ते उत्पाद बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में कारोबार करने का तरीका सरल बनाया जाना चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाना चाहिए तथा क्षेत्र विशेष के लिए नीतियां होनी चाहिए। आईटीसी के प्रमुख वाई.सी. देवेश्वर ने कहा कि पिछले पांच छह वर्षों में रोजगार रहित विकास हुआ है। वर्ष भर में मात्र 20 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा था जबकि प्रति वर्ष 1.2 करोड़ लोगों को रोजगार देने की जरूरत