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फर्जी डॉक्टर बनवाकर व्यापमं का चपरासी बन गया बंगले का मालिक

7 वर्ष पहले
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1998 से बाबू के साथ मिलकर कर रहा था फर्जीवाड़ा

ग्वालियर| व्यावसायिकपरीक्षा मंडल (व्यापमं) का चपरासी भी फर्जी डॉक्टर बनवा रहा था। सोमवार को इस चपरासी को एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया। इसने पांच एमबीबीएस डॉक्टरों को प्रीपीजी भी कराई थी। फर्जीवाड़े की कमाई से चपरासी भोपाल में बंगले का मालिक बन गया। अब वह हवालात में है पुलिस ने उसे 4 अक्टूबर तक के लिए रिमांड पर लिया है और उससे व्यापमं के अन्य अधिकारियों कर्मचारियों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

एएसपी वीरेंद्र जैन ने बताया कि पूर्व में पकड़े गए व्यापमं के बाबू बृजमोहन ने पूछताछ के दौरान बताया था कि चपरासी रामगोपाल शर्मा भी उसके पास पीएमटी प्रीपीजी के केस लाता था। इसी आधार पर उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था, सुबह उसके आने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस की गिरफ्त में आये चपरासी रामगोपाल ने बताया कि वह 1998 से व्यापमं के अस्सिटेंट प्रोगामर सीके मिश्रा से जुड़ा था और तब से ही फर्जीवाड़ा कर रहा था। उसने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया कि उसने 10 छात्रों को फर्जी तरीके से पीएमटी में सलेक्ट कराया है। इसके अलावा 5 एमबीबीएस डॉक्टर को वह प्रीपीजी में भी पास करा चुका है। रामगोपाल ने यह भी बताया कि वह पीएमटी के लिए 10-15 लाख और प्रीपीजी के लिए 25-30 लाख रुपए में डील करता था। रामगोपाल शर्मा को पुलिस ने सोमवार को ही जेएमएफसी महेश कुमार झा की कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे चार अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया।