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50 हजार से ज्यादा नौकरियां हर वर्ष मिलेंगी, बेहतर पैकेज केवल 10% को

6 वर्ष पहले
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कैंपस बज़

पॉलीमर इंजीनियरिंग का कोर्स कर भी ले सकते हैं एंट्री

इसफील्ड में कॅरिअर बनाने वाले छात्र प्लास्टिक के अलावा पॉलीमर इंजीनियरिंग का कोर्स कर एंट्री ले सकते हैं। देश भर के संस्थानों में इनके यूजी, पीजी और डिप्लोमा कोर्स मौजूद हैं। आईआईटी संस्थानों सहित बीआईटी-मेसरा, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, कलकत्ता यूनिवर्सिटी और सिपेट-चेन्नई से इसका यूजी कोर्स किया जा सकता है। फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के साथ 10+2 कर चुके छात्र इसमें प्रवेश ले सकते हैं। अधिकतर संस्थानों में जेईई के स्कोर के आधार पर एडमिशन दिया जाता है और हर सीट के लिए सौ से ज्यादा उम्मीदवार होते हैं।

Âप्रति व्यक्तिखपत: देशमें प्लास्टिक की प्रति व्यक्ति खपत केवल 9.7 किग्रा है। अमेरिका में यह आंकड़ा 109 किग्रा, चीन में 45 किग्रा और ब्राजील में 32 किग्रा है।

Âविदेशी निवेश:2018तक इंडस्ट्री में 600 अरब रु. के विदेशी निवेश का अनुमान है। कंपनियां उत्पादन की प्रक्रिया को बेहतर और क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश करना चाहती हैं। Âसरकारी नीतियां:प्लास्टिकइंडस्ट्री में 100 फीसदी विदेशी निवेश की अनुमति है। सरकार के स्वच्छ भारत, मेक इन इंडिया और स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स से इसका और तेज विस्तार होगा।

}तेज विस्तार: इसवर्ष के अंत तक 40 हजार से ज्यादा नई प्रोसेसिंग मशीनें लगाने का लक्ष्य निर्धारित है। देश की पॉलीमर इंडस्ट्री की क्षमता भी सालाना करीब 10 फीसदी की दर से बढ़ रही है।

कॅरिअर इन प्लास्टिक इंजीनियरिंग