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जीवन के यज्ञ में नारी देती है ज्यादा आहुति : अन्ना महाराज
अमझेरा में यज्ञ की पूर्णाहुति पर भंडारा
भास्करसंवाददाता | अमझेरा
यज्ञके माध्यम से हम अपने तन, मन एवं निवास स्थान के साथ संपूर्ण वातावरण को भी पवित्र करते हैं। इस यज्ञ के माध्यम से निश्चित ही अमझेरा की समृद्धि होकर यहां विकास के नए आयाम खुलेंगे। यज्ञ एक जीवन है, एक कर्म है, एक शिक्षा है, एक माध्यम है। इस देह को परम पिता परमात्मा के करीब ले जाने का। यज्ञ की आहुतियां साधारण नहीं होती है, सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक अपने दैनिक जीवन में हम विभिन्न प्रकार की आहुतियां डालते हैं लेकिन सबसे ज्यादा आहुतियां नारी के द्वारा डाली जाती है। क्योंकि वह घर की सभी गतिविधियों को संचालित करती हुई उसे स्वर्ग के समान बनाती है। नारी के रूप में ईश्वर ने सृष्टि पर एक ऐसी महान संरचना की है जो पुरुष ही नहीं अपितु पूरे कुल का उद्धार करती है। यह बात राजराजेश्वर शिवालय में शिव-शक्ति यज्ञ की पूर्णाहुति में आए संत अन्ना महाराज ने श्रद्धालुओं से कही। सुबह से ही अमका-झमका मंदिर से लेकर राजराजेश्वर मंदिर तक दूर-दूर से आए दर्शनार्थी हजारों की तादाद में आए। पूर्णाहुति के पूर्व डॉ. पंडित आशीष कानूनगो ने कुंदनपुर से लेकर अमझेरा तक के सफर के इतिहास का वाचन किया। मंदिर शिखर पर लाभार्थियों ने पंडितों के मंत्रोच्चारण के साथ स्थापना की। चापड़ा से आए पं. महाकाल रवींद्र तिवारी ने जब मां अंबिका एवं भगवान शिव की आरती को स्वर प्रदान किया। कीर्तन की मस्ती में भी सभी थिरकने लगे। आयोजन समिति ने यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद भंडारा रखा। हजारों लोगों ने प्रसाद लाभ लिया।यज्ञाचार्य पं. सचिन रावल के साथ सभी पंडितों का आभार माना गया। महंत शांतिदास महाराज, फतियापुरा धाम के महंत गरूड़दास महाराज एवं पं. प्रहलाद पारिक उपस्थित थे।
अन्ना महाराज
अमझेरा. पूर्णाहुति अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे।