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रक्षा सचिव थे सिर्फ इसलिए नहीं रोक सकते सीएजी बनने से : सुप्रीम कोर्ट

6 वर्ष पहले
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सुप्रीमकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए शशिकांत शर्मा को लेखा एवं महानियंत्रक परीक्षक (सीएजी) नियुक्त करने पर रोक की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। 61 साल के शर्मा बिहार कैडर के आईएएस हैं और रक्षा सचिव रह चुके हैं।

शर्मा की नियुक्ति पर कुछ पूर्व नौकरशाहों ने आपत्ति जताई थी। उनकी दलील थी कि शर्मा ने कई रक्षा सौदों में लेन-देन कराया है। संभव है कि ऑडिट रिपोर्ट बनाते हुए हितों का टकराव हो। कोर्ट ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि ‘ऐसी किसी परिस्थिति में विभाग का सबसे वरिष्ठ अधिकारी जांच कर सकता है। शर्मा के खिलाफ कुछ भी नहीं है, फिर इन्हें सीएजी बनने से क्यों रोका जाए’? न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि ‘कोर्ट संवैधानिक प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकता। याचिका आधारहीन है।’ इससे पहले हाईकोर्ट ने भी शर्मा की नियुक्ति को वैध बताया था।

कोर्ट ने चयन प्रक्रिया की गाइडलाइन पर भी कोई आदेश देने से मना कर दिया। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि संविधान सीएजी जैसे संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के लिए सरकार को राष्ट्रपति को सलाह देने की छूट देता है।



याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार ने एकतरफा फैसला करते हुए सीएजी की नियुक्ति की थी। मौजूदा प्रक्रिया के तहत केबिनेट सचिव सीएजी के लिए नामों का चयन कर प्रधानमंत्री को भेजते हैं। पीएम राष्ट्रपति को उस नाम की सिफारिश करते हैं। इसमें पारदर्शिता का अभाव है।