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दूसरी मंजिल नहीं बनी, ठेका पद्धति पर उठे सवाल
दूसरी मंजिल नहीं बनी, ठेका पद्धति पर उठे सवाल
ट्रामासेंटर का जो नक्शा स्वीकृत होकर 4.28 करोड़ रुपए शासन ने दिए, उसमें दो मंजिला निर्माण प्रस्तावित है लेकिन ठेका हो जाने के बाद निर्माण शुरू हुआ और पहली मंजिल बनी, उसके बाद ठेकेदार ने दूसरी मंजिल पर निर्माण करने से इंकार कर दिया। बताया कि बचे निर्माण के लिए और पैसा लगेगा। पीआईयू ने भी पुराने रेट में स्वीकृति बताकर लगभग डेढ़ करोड़ का रिवाइज्ड इस्टीमेट भेज दिया, जिसकी शासन ने स्वीकृति दी और ही दूसरी मंजिल पर निर्माण हुआ। प्राइवेट वार्ड, एसएनसीयू, पैथालॉजी, डॉक्टर ड्यूटी रूम, स्टोर, रिकॉर्ड रूम, फीडिंग रूम आदि कई प्रस्तावित निर्माण नहीं किए गए हैं। पैसे खत्म होने का बहाना कर भवन अधूरा बनाने से ठेका पद्धति पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल ठेका होने के पहले डीपीआर देख ठेकेदार वह रेट डालता है, जिसमें वह बताता है कि इस दर में प्रस्तावित निर्माण मैं करके दूंगा। निर्माण सामग्री के भाव घटने-बढ़ने का रिस्क ठेकेदार का होता है।
कुछ सुधार, कुछ यथावत
लेबररूम में फर्श का ढलान देकर ड्रेनेज व्यवस्था कर दी है लेकिन एक बाथरूम के दो दरवाजे कर दिए हैं। ओटी में स्क्रब एरिया में हाथ धोने के बेसिन को सुधारा है और एक्स-रे रूम में रेडियोलॉजिस्ट की अलग से इंट्री के लिए दरवाजा बना दिया है। वेंटिलेशन के लिए कुछ खिड़कियां लगा दी हैं। कमिश्नर ने सिटी स्कैन कक्ष मात्र 3.10 बाय 6.2 बनाने को गलत बताया था। मशीन रखने के बाद ऑपरेट करने की ही जगह नहीं होने की बात कही थी। यह रूम यथावत है।
जिम्मेदारबोले...
^कमिश्नरका पत्र पीआईयू को दे दिया है। वे सुधार कर जवाब देंगे। उनका जवाब आने के बाद हम सोचेंगे कि भवन टेकओवर करें या नहीं। राशि के दुरुपयोग की जांच का विषय हमारा नहीं है। डॉ.वंदना खरे, सीएमएचओ धार
^कमिश्नरने पत्र शासन को लिखा था, फिर भी हमने बताए गए सुधार कर दिए हैं। दूसरी मंजिल बनाने से इंकार नहीं है। राशि कम पड़ने से नहीं बनाई है। रिवाइज्ड इस्टीमेट एक साल पहले से भेजा है, राशि मिलेगी तो ऊपरी मंजिल पर निर्माण करेंगे। चंद्रशेखरनीम, ईई पीआईयू (लोनिवि) धार