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कम कीमत पर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होगी मुश्किल
प्रॉपर्टीकी खरीद-फरोख्त में कालेधन का इस्तेमाल अब मुश्किल हो सकता है। सरकार ऐसे सौदों की पहचान कर रही है जहां स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए प्रॉपर्टी की कीमत कम बताई गई है। इसका एक डाटाबेस भी तैयार किया जाएगा जिसके आधार पर प्रॉपर्टी की गाइडेंस प्राइस तय होगी। गाइडेंस प्राइस को कई जगहों पर सर्किल या कलेक्टर रेट भी कहा जाता है। इससे कम पर किसी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं हो सकती है। अभी प्रॉपर्टी की वास्तविक कीमत सर्किल रेट से काफी ज्यादा होती है। खरीदार अक्सर सर्किल रेट पर ही प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराते हैं, इससे उन्हें कम स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ती है।
पिछले दिनों हुई आर्थिक सतर्कता परिषद की बैठक में आयकर विभाग और कंट्रोलर ऑफ स्टांप्स डिपार्टमेंट के बीच सूचनाएं साझा करने पर भी बात हुई। आयकर विभाग को जहां भी कम कीमत दर्शाने का पता चलेगा, वह इसकी जानकारी कंट्रोलर ऑफ स्टांप्स को देगा। शेष-पेज 5 पर
यहविभाग इस सूचना के आधार पर डाटाबेस तैयार करेगा। इस डाटाबेस से किसी क्षेत्र विशेष में प्रॉपर्टी की वास्तविक कीमत का अंदाजा लग सकेगा।
लोगों द्वारा प्रॉपर्टी की कम कीमत दर्शाने की एक वजह ऊंची स्टांप ड्यूटी भी है। रियल एस्टेट सेक्टर काफी दिनों से स्टांप ड्यूटी घटाने की मांग कर रहा है।